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डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0
डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत
असल दिक्कत यह है कि घर का फर्नीचर ऑफिस के लिए बना ही नहीं होता.

 

Work From Home Neck Pain: कोविड काल से शुरू हुआ वर्क फ्रॉम होम का कल्चर अब लोगों की आदत बन चुका है.

हालांकि, इससे कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.

 

Sitting Posture While Working From Home: वर्क फ्रॉम होम अब अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. जो व्यवस्था कभी अस्थायी समाधान के तौर पर शुरू हुई थी, आज कई लोगों के लिए वही स्थायी ऑफिस बन गई है. न ट्रैफिक का झंझट, न तय समय की पाबंदी और घर के आराम में काम करने की आजादी, यह सब सुनने में जितना आसान लगता है, उतना ही आकर्षक भी है. लेकिन इसी आराम के बीच एक ऐसी आदत पनप रही है, जिस पर लोग ध्यान नहीं दे रहे, घर से काम करने का गलत तरीका.

 

सोफा, बेड, डाइनिंग टेबल या फिर फर्श पर बैठकर लैपटॉप पर काम करना अब आम बात हो गई है. मोबाइल देखते समय घंटों गर्दन झुकाए रखना, लैपटॉप गोद में रखकर काम करना या आधी लेटी अवस्था में मीटिंग अटेंड करना शुरुआत में भले ही आरामदेह लगे, लेकिन शरीर इसे चुपचाप सहन करता रहता है, असर धीरे-धीरे दिखता है.

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सीनियर स्पाइन सर्जन डॉ. नवीन पंडिता ने TOI को बताया कि वर्क फ्रॉम होम अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन गलत पॉस्चर और खराब बैठने की आदतें रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा रही हैं. उनके मुताबिक, अब पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा लोग गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं.

 

असल दिक्कत यह है कि घर का फर्नीचर ऑफिस के लिए बना ही नहीं होता. डाइनिंग चेयर लंबे समय तक बैठने के लिए नहीं होती, बेड पीठ को कोई सपोर्ट नहीं देता और सोफा रीढ़ की हड्डी को गलत एंगल में मोड़ देता है. रोज कई घंटे इसी तरह बैठने से गर्दन में जकड़न, कमर दर्द, कंधों में खिंचाव, सिरदर्द और आंखों में जलन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं.

 

इन दिक्कतों के बढ़ रहे मामले

डॉक्टरों के अनुसार, अब 20 और 30 की उम्र के युवाओं में भी क्रॉनिक लोअर बैक पेन और सर्वाइकल पेन के मामले बढ़ रहे हैं. कंप्यूटर स्क्रीन अक्सर आंखों की ऊंचाई से नीचे होती है, जिससे लोग आगे की ओर झुककर बैठते हैं और रीढ़ पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है. समस्या यह है कि दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. पॉस्चर खराब होने का असर सिर्फ मांसपेशियों तक सीमित नहीं रहता. इससे सांस लेने की प्रक्रिया, ब्लड सर्कुलेशन, पाचन और यहां तक कि एकाग्रता पर भी असर पड़ता है. जब शरीर असहज होता है, तो दिमाग भी पूरी तरह फोकस नहीं कर पाता.

 

अच्छी बात यह है कि इसके लिए महंगे ऑफिस सेटअप की जरूरत नहीं. स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना, पैरों को ज़मीन पर टिकाकर बैठना, कमर के पीछे तौलिया या कुशन का सहारा लेना और हर 30 से 40 मिनट में उठकर थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना काफी मददगार हो सकता है. डॉ. पंडिता सलाह देते हैं कि अगर दर्द चार से छह हफ्तों तक बना रहे, बढ़ता जाए या सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मिलना चाहिए. समय रहते छोटी आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो वर्क फ्रॉम होम से जुड़ी बड़ी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

 

कैसे कर सकते हैं ठीक?

डॉक्टर बताते हैं कि अब 20 और 30 की उम्र के लोग भी क्रॉनिक लोअर बैक पेन, गर्दन दर्द और कंधों की जकड़न के साथ आ रहे हैं. स्क्रीन नीचे होने से लोग आगे की ओर झुककर बैठते हैं, जिससे रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए महंगे फर्नीचर की जरूरत नहीं. स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना, पैरों को जमीन पर टिकाकर बैठना, कमर के पीछे तौलिया रखकर सपोर्ट देना और हर 30 से 40 मिनट में उठकर स्ट्रेच करना काफी मददगार हो सकता है.

 

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

  Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम की देवी हैं. जानिए दूसरे दिन माता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, और शुभ योग के बारे में?   Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं.    मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में.   मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ?   मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए.    'ब्रह्मचारिणी' नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी.   पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी.    नवरात्र के दूसरे दिन खास योग!   चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है.   धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है.    मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi)   नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें.   मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है.    मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra)   या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥   इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है.  माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए.    मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog) नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.    ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)   जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी।   रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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ब्लैक मैजिक या नेगेटिव एनर्जी से जूझ रहे हैं? इन 4 तरीकों से खुद को रखें सुरक्षित!

  कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       क्या आप भी अपने आसपास नकारात्मक ऊर्जा को महसूस करते हैं, डरावने सपने देखते हैं या कुछ अजीब-सा अनुभव करते हैं? आप सोच रहे होंगे, अरे यह तो सामान्य बात है, सबके साथ होती है. जी हां, यह आम बात है और सबके साथ होती भी है, लेकिन क्या आप जानना चाहेंगे ऐसा क्यों होता है?       यह हम सभी के साथ ईर्ष्या, बुरी नजर और दबी हुई दुर्भावना के कारण हो रहा है, जो हमारे मन, शरीर और मनोविज्ञान को प्रभावित कर रहा है. इस भावना को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे अपने आसपास घटित घटनाओं के जरिए महसूस किया जा सकता है. इस लेख के माध्यम से हम उन लोगों को बताएंगे कि, इस स्थिति से कैसे निपटें?       काले जादू से खुद को बचाने के लिए आध्यात्मिक बनें. आध्यात्म होना उबाऊ नहीं है और न ही इसका मतलब 24 घंटे पूजा करनी है, बल्कि यहां हमारा मतलब है कि, आपको आध्यात्मिकता के बारे में पढ़ना और जानना चाहिए. आपको अपनी ऊर्जा को रक्षा करने और संरक्षित करना सीखना चाहिए. आपको ध्यान, योग और श्वास तकनीक सीखनी होगी. यह अभ्यास आप किसी भी आध्यात्मिक गुरु से सीख सकते हैं या किसी जानकार से मार्गदर्शन ले सकते हैं.       हनुमान चालीसा सबसे शक्तिशाली पाठों में से एक है, जिसे कोई भी पढ़ सकता है. यदि हम कहते हैं कि, कोई भी तो इसका मतलब यह नहीं है कि केवल हिंदू ही इसका पाठ कर सकते हैं, बल्कि सभी लोग कर सकते हैं. इसका धर्म, जाति या पंथ से कोई लेना-देना नहीं है. यह हम मानवता की बात कर रहे हैं और आपको अपनी सुरक्षा के लिए इसका पाठ करना चाहिए. जिन लोगों के पास संपूर्ण हनुमान चालीसा पाठ करने का समय नहीं है, उन्हें चालीसा से जुड़ी इस पंक्ति- "संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बल बीरा" "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे" उच्चारण करना चाहिए.       हनुमान चालीसा के बाद हम दुर्गा सप्तशती पाठ की ओर बढ़ते हैं. शास्त्रों मं काले जादू को एक शक्तिशाली आक्रमण बताया गया है और इससे निपटना काफी मुश्किल है, लेकिन आप दुर्गा माता की तरह अपने दुश्मनों पर जीत हासिल कर सकते हैं, जिन्होंने महिषासुर और अन्य राक्षसों का अंत किया था. ये पाठ हमारी सुरक्षा के लिए हैं और इन पवित्र ग्रंथों का हमें जरूर पढ़ना चाहिए   काला जादू दूर करने का एक और सरल उपाय है, वो है महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना. इस मंत्र को सुनना भी कारगर है, लेकिन हम केवल उन्हीं लोगों को इसे सुनने जकी सलाह दे रहे हैं, जिन्हें इसका उच्चारण नहीं आता. गलत तरीके से उच्चारण करने से बचें, क्योंकि इससे अच्छे परिणाम नहीं मिलेंगे. इसे 108 बार सुनें. जो लोग प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करते हैं, उनके लिए यह चमत्कारिक रूप से कारगर होता है.

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0
डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत

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अंजीर खरीदते वक्त क्या है उन्हें पहचानने का तरीका, जिससे भूलकर भी न हो गलती?

  How To Identify Sweet Anjeer: अंजीर हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. हालांकि इसको खरीदने से पहले आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए वरना अंजीर खराब निकल सकती है.   How To Identify Fresh And Sweet Anjeer: अंजीर, जिसे ड्राई फिग्स भी कहा जाता है, अपने मीठे स्वाद और सेहत से जुड़े फायदों की वजह से काफी पसंद किया जाता है. चाहे इसे स्नैक के रूप में खाएं या किसी मिठाई में मिलाएं, अच्छी क्वालिटी का अंजीर स्वाद के साथ-साथ पोषण भी बढ़ाता है. लेकिन बाजार में मिलने वाला हर अंजीर मीठा या ताजा हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार लोग सख्त या बासी अंजीर खरीद लेते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें सही पहचान नहीं होती,    सही अंजीर की पहचान कैसे कर सकते हैं   अलग- अलग रिपोर्ट के अनुसार, अंजीर आमतौर पर सूखे रूप में मिलता है, इसलिए उसकी क्वालिटी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कैसे प्रोसेस और स्टोर किया गया है. अगर आप मीठा और अच्छा अंजीर लेना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले, अंजीर की नरमी जांचें. अच्छा अंजीर हमेशा हल्का सॉफ्ट और स्पंजी होता है. अगर यह बहुत ज्यादा सख्त या सूखा लगे, तो समझ लें कि वह ताजा नहीं है. वहीं हल्का चिपचिपा और मुलायम अंजीर अच्छी क्वालिटी और मिठास का संकेत देता है. खरीदते समय हल्का दबाकर इसकी ताजगी का अंदाजा लगाया जा सकता है.    रंग और दिखावट से कैसे पता कर सकते हैं   इसके बाद, उसके रंग और दिखावट पर ध्यान दें. ताजा और मीठा अंजीर आमतौर पर हल्के भूरे या सुनहरे रंग का होता है. अगर अंजीर का रंग बहुत गहरा, फीका या उस पर काले धब्बे नजर आएं, तो यह खराब स्टोरेज या पुराना होने का संकेत हो सकता है. समान रंग और बिना दरार वाला अंजीर बेहतर माना जाता है. अंजीर की खुशबू भी काफी अहम होती है. अच्छे अंजीर में हल्की और प्राकृतिक मिठास वाली खुशबू होती है, अगर उसमें खट्टापन महसूस हो या कोई खुशबू न आए, तो वह अच्छी क्वालिटी का नहीं हो सकता. इसके साथ ही, ऊपर से चीनी की परत चढ़े अंजीर से बचना बेहतर है.   अगर संभव हो तो अंजीर को तोड़कर उसके अंदर का हिस्सा भी देखें. अच्छा अंजीर अंदर से भरा हुआ और बीजों से युक्त होता है. ये बीज ही उसके स्वाद और पोषण को बढ़ाते हैं. वहीं खराब अंजीर अंदर से सूखा या खाली लग सकता है.    किनको खरीदने से बचना चाहिए   बहुत ज्यादा सूखे या सख्त अंजीर खरीदने से बचें. ऐसे अंजीर में नमी कम होती है और ये खाने में भी अच्छे नहीं लगते. सही अंजीर में हल्की नमी और सॉफ्टनेस बनी रहती है, भले ही वह ड्राई हो. स्टोरेज का भी खास ध्यान रखें. अंजीर को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखा जाना चाहिए. खरीदते समय देखें कि वह साफ और बंद कंटेनर में रखा हो, ताकि उसकी क्वालिटी बनी रहे.  

Metroheadlines मार्च 26, 2026 0

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युवा हैं और शरीर में दिख रहे ये 5 साइलेंट लक्षण तो हो जाएं अलर्ट, वरना यह कैंसर बना लेगा शिकार

  Constipation And Diarrhea Causes: कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसके 5 लक्षण कौन से दिखाई देते हैं.     What Are The Early Signs Of Colon Cancer: आजकल युवाओं में कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे लेकर डॉक्टरों ने खास चेतावनी दी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाती है, तो इसके बाद सर्वाइवल रेट काफी कम होकर लगभग 10 प्रतिशत तक रह जाता है. इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके.     क्या कहते हैं एक्सपर्ट?   सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार ये लक्षण दर्द भी नहीं करते, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते. ब्रिस्टल के द लैगॉम क्लिनिक के जीपी डॉ. जैक ओग्डेन के अनुसार, ये पांच लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि इनमें ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता।, कुछ ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.      क्या होते हैं संकेत?   पहला संकेत है आयरन की कमी यानी एनीमिया. अगर बिना किसी वजह के थकान, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. कई बार यह अंदरूनी ब्लीडिंग की वजह से होता है, जो ट्यूमर के कारण हो सकती है.   दूसरा लक्षण है मल त्याग से जुड़ी दिक्कतें. जैसे बार-बार कब्ज या दस्त होना, या फिर स्टूल का बहुत पतला हो जाना. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आंत में कोई रुकावट है, जो ट्यूमर की वजह से बन रही हो.   तीसरा संकेत है बिना कोशिश के अचानक वजन कम होना। अगर आप डाइटिंग या एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं, फिर भी वजन तेजी से घट रहा है, तो यह शरीर के अंदर किसी समस्या का संकेत हो सकता है. कई बार ट्यूमर की वजह से शरीर पोषक तत्वों को सही से अब्जर्व नहीं कर पाता.   चौथा लक्षण पेट से जुड़ा होता है, जैसे लगातार दर्द, ऐंठन या थोड़ी सी मात्रा में खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना. यह संकेत भी आंत से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है.     मल में खून आना   पांचवां और सबसे अहम संकेत है मल में खून आना. अगर स्टूल में काला या गहरा लाल रंग दिखे, तो यह शरीर के अंदर कहीं ऊपर ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है. हालांकि, कई बार यह बवासीर या एनल फिशर की वजह से भी हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर इन लक्षणों में से कोई भी लंबे समय तक बना रहे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. खासकर स्टूल टेस्ट और अन्य मेडिकल जांच से सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है.  

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0

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