UP Assembly Election 2027: पूर्वी यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने कहा कि हमारी पार्टी का बीजेपी से गठबंधन केंद्र में है, राज्य में नहीं है. यूपी चुनाव 2027: लोजपा (रामविलास) का बड़ा ऐलान, सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव एनडीए गठबंधन का हिस्सा रही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। यह ऐलान पार्टी के पूर्वी यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र में पार्टी का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के साथ जारी रहेगा, लेकिन प्रदेश स्तर पर किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। राजीव पासवान ने कहा कि पार्टी “यूपी फर्स्ट, यूपी वाले फर्स्ट” के मिशन के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और प्रदेश की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देगी। उनका दावा है कि 2027 के चुनाव में सत्ता की चाबी लोजपा (रामविलास) के हाथ में होगी। इस बयान के साथ ही उन्होंने अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘पीडीए’ के नाम पर वंचित समाज को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को कांशीराम और भीमराव आंबेडकर की याद आ रही है। इसी तरह उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी, तब कांशीराम को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया। राजीव पासवान ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक आरोप दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने ही बाबा साहब आंबेडकर को दो बार लोकसभा चुनाव हराने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान के कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रही है और उसे व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रामविलास) का केंद्र और बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन है। चिराग पासवान वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं और बिहार की राजनीति में भी उनकी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
Azamgarh News In Hindi: पुलिस ने इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरोह ने 13 बैंक खातों का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर देशभर में लोगों को ठगने वाले संगठित साइबर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से मोबाइल, एटीएम कार्ड, सिम, बैंक पासबुक और डमी पार्सल समेत बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ है. गुजरात के अहमदाबाद की एक युवती ने 9 मार्च 2026 को ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में जांच शुरू की गई. तकनीकी साक्ष्यों और प्रतिबिम्ब पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर 24 मार्च को कोतवाली क्षेत्र के कोल बाजबहादुर में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अवन राजभर उम्र 22 वर्ष निवासी ऊंचागांव थाना रानी की सराय और प्रियांशू यादव उम्र 19 वर्ष निवासी शिवरामपुर थाना तहबरपुर के रूप में हुई है. ऐसे देते थे ठगी को अंजाम पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर गंगा हिल्स, गंगा क्लॉथ और वेल्साइड क्लोथिंग जैसे नामों से फर्जी पेज बनाते थे. इन पेजों पर सस्ते दाम में आकर्षक प्रोडक्ट दिखाकर ग्राहकों को लुभाया जाता था. इसके बाद व्हाट्सएप बिजनेस के जरिए संपर्क कर ग्राहकों से क्यूआर कोड के माध्यम से एडवांस भुगतान कराया जाता था. भुगतान मिलने के बाद या तो सामान भेजा ही नहीं जाता था या फिर बेहद घटिया क्वालिटी का पार्सल भेजकर ग्राहकों को ब्लॉक कर दिया जाता था. जांच में सामने आया कि गिरोह ने ठगी के लिए 13 बैंक खातों का इस्तेमाल किया और असम, बंगाल, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से कुल 27 शिकायतें इन खातों के खिलाफ दर्ज हैं. बरामदगी में मिले अहम डिजिटल साक्ष्य पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 550 रुपये नगद, 13 बैंक पासबुक, 1 चेकबुक, 5 एटीएम कार्ड, 9 सिम कार्ड, 30 डमी पार्सल पैकेट और पैकेजिंग सामग्री बरामद की है. मोबाइल फोन की जांच में फर्जी आईडी, चैट और लेन-देन से जुड़े अहम डिजिटलसाक्ष्य भी मिले हैं. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66डी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. एसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान शॉपिंग पेज या ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें. बिना पुष्टि के किसी भी क्यूआर कोड पर भुगतान न करें और ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
UP Politics: सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पेंशन को फिर से लाकर हम महिलाओं की ताकत बढ़ाएंगे और साथ ही यूपी की संपूर्ण उन्नति के अपने संकल्प को निभाएंगे. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ बताया और कहा कि इनको समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘पीडीए’ शब्द पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को संबोधित करने के लिए गढ़ा था. अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ अग्रणी महिलाओं के साथ अपनी पत्नी सांसद डिंपल यादव समेत खुद की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ‘‘आधी आबादी की पूरी आजादी व उनकी हिफाजत के साथ-साथ उनके हक-अधिकार, सशक्तीकरण व सबलीकरण के लिए हम सब सदैव कटिबद्ध-प्रतिबद्ध रहे हैं और रहेंगे.” उन्होंने कहा, “जब परिवार-समाज और देश को मजबूत करने वालों को सम्मान मिलता है तो उनका मान और मनोबल दोनों बढ़ता है. हम पीडीए में शामिल ‘ए’ मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात हर बच्ची, युवती, नारी, महिला को सामाजिक-आर्थिक रूप से समान सम्मान देने और अपने पैरों पर खड़े होने व उन्हें समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘समाजवादी पेंशन’’ को फिर से लाकर हम महिलाओं की ताकत बढ़ाएंगे और साथ ही ‘यूपी की संपूर्ण उन्नति’ के अपने संकल्प को निभाएंगे. इससे पहले सपा चीफ ने कहा कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनती है तो नारी समृद्धि सम्मान योजना शुरू की जाएगी. इस योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को हर साल 40000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी. वहीं पूर्व सीएम ने कहा कि फसल बदलनी है तो बीज बदलने होंगे, स्त्री के प्रति जब मूलभूत मानसिक बीज बदलेंगे तभी उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा. इसी संदर्भ में ‘मालती देवी-मूर्ति देवी महिला सम्मान समारोह’ के माध्यम से हमने उन महिलाओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने का प्रयास करा है जिनकी प्रतिभा, हिम्मत और सद्प्रयासों से नारी का सशक्त रूप उभर कर आया है.
Uttarakhand Cabinet Expansion: उत्तराखंड की धामी सरकार में पांच नए मंत्री शामिल हो गए हैं. राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, मदन कौशिक और खजान दास ने मंत्री पद की शपथ ली. Pushkar Singh Dhami की सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार आखिरकार Navratri के शुभ अवसर पर संपन्न हो गया, जो उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। यह विस्तार लंबे समय से चर्चा में था और राजनीतिक हलकों में इसके संकेत लगातार मिल रहे थे। राज्यपाल Gurmit Singh (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया, उनमें Khajan Das, Bharat Singh Chaudhary, Madan Kaushik, Pradeep Batra और Ram Singh Kaida शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक विशेष सांस्कृतिक रंग दिया। इसके बाद मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। यह कैबिनेट विस्तार कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि धामी मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद खाली थे, जिससे सरकार के कामकाज और प्रशासनिक संतुलन पर असर पड़ रहा था। इन रिक्त पदों को भरने के साथ ही सरकार ने न केवल प्रशासनिक मजबूती हासिल की है, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और विधायकों के पिछले प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसले ले रही है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विस्तार भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को संतुलित करने का भी प्रयास है। पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। यह भी स्पष्ट है कि इस निर्णय में केवल राज्य स्तर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति भी शामिल रही है। Navratri के दौरान इस विस्तार का होना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारतीय राजनीति में अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को शुभ समय के रूप में देखा जाता है, और इसी परंपरा के तहत इस विस्तार को भी एक नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार अब एक नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगी। इस विस्तार के बाद सरकार की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। नए मंत्री अपने-अपने विभागों में नई योजनाएं और नीतियां ला सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि ये मंत्री अपने क्षेत्रों में जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं। आने वाले समय में इनकी भूमिका सरकार की छवि और प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी। इसके अलावा, यह विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है, और इस बात का ध्यान रखते हुए ही मंत्रियों का चयन किया गया है। इससे पार्टी को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अगर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो यह कैबिनेट विस्तार केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम है। इसके जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सक्रिय है, निर्णय लेने में सक्षम है और राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम विपक्ष के लिए भी एक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल ने अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, किसी भी कैबिनेट विस्तार की असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नए मंत्री अपने दायित्वों को किस तरह निभाते हैं। केवल पद देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन पदों पर बैठकर प्रभावी काम करना ही असली कसौटी होती है। इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विस्तार कितना सफल साबित होता है। अंततः, Pushkar Singh Dhami सरकार का यह कदम उत्तराखंड की राजनीति में एक नई दिशा और गति देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल प्रशासनिक मजबूती का संकेत है बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।
प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. उत्तराखंड कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. न्यायालय ने दोनों पक्षों को 18 मार्च तक अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियमों और पदों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अदालत ने यह जानना चाहा कि राज्य कैडर से इस स्तर के कितने अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में भेजा जा सकता है और कितने पद स्थायी रूप से राज्य सरकार के अधीन रहते हैं. आईटीबीपी-बीएसएफ में है आदेश दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर भेजने का आदेश जारी किया गया है. वहीं वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है. यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को जारी किए गए थे. 6 मार्च को जारी हुए थे आदेश केंद्र सरकार के आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए थे. हालांकि, इन आदेशों को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की. सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार में ऐसे कुल 16 पद हैं, जिन पर राज्य कैडर के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भेजा जा सकता है. बाकी पद राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहते हैं. अदालत ने इस जानकारी के बाद केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया किन नियमों और प्रावधानों के तहत की गई है. मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की है. साथ ही दोनों सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तब तक अपने-अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें. अगली सुनवाई 18 मार्च को अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जिसमें अदालत सरकारों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी. यह मामला प्रशासनिक और सेवा नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Haridwar News: उत्तराखंड सरकार के 4 वर्ष पूरे होने पर हरिद्वार में अमित शाह ने 1129 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया. धामी सरकार ने UCC लागू कर, SDG रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया. देवभूमि उत्तराखंड में विकास और सुशासन के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज हरिद्वार में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं. कार्यक्रम के दौरान वे राज्य में 1129.91 करोड़ की लागत से तैयार 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद हैं. हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम को धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं और विकास की दिशा में नई मिसाल कायम की है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कई अहम नीतिगत फैसले लिए हैं. उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए. इसके साथ ही धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानून लागू कर कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया. सरकार का कहना है कि राज्य में सेवा, सुशासन और जनहित को केंद्र में रखकर विकास कार्यों को गति दी गई है. सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की रैंकिंग में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, जो राज्य के विकास मॉडल को दर्शाता है. वहीं व्यवसाय करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस) में भी राज्य को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है. धामी सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया पर्यटन और फिल्म शूटिंग के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है. राज्य को लगातार चार वर्षों तक ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. वहीं चारधाम यात्रा में हर वर्ष नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिला है. धामी सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया. राज्य के इतिहास में पहली बार 12 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया. इसके साथ ही खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गईं. सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसके बाद पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई. हरिद्वार में आयोजित यह कार्यक्रम राज्य सरकार के चार वर्षों की उपलब्धियों को समर्पित है, जिसमें विकास कार्यों, सुशासन और भविष्य की योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को विकास के नए आयाम तक पहुंचाना है.
LPG Price Hike: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में दाम 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये की बढ़ोत्तरी की है. इस पर यूपी की महिलाओं की प्रतिक्रिया सामने आई है. मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है और इसका सीधा असर भारत में एलपीजी गैस की कीमतों पर देखने को मिला है। भारत में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर यानी 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं, जिससे देशभर में करोड़ों परिवारों को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ने वाला है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में एलपीजी गैस का उपयोग करोड़ों परिवारों की रसोई का आधार बन चुका है। ऐसे में इसकी कीमत में छोटी सी बढ़ोतरी भी बड़े आर्थिक प्रभाव पैदा करती है। अब 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कई शहरों में और ज्यादा हो गई है। इंडियन ऑयल ने बढ़ाई कीमतें घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान Indian Oil Corporation द्वारा किया गया है। कंपनी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलपीजी की लागत बढ़ी है, जिसके चलते कीमतों में बदलाव करना पड़ा है। तेल कंपनियों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने का असर सीधे एलपीजी के दामों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है। घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा नए फैसले के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी देश के अलग-अलग शहरों में लागू हो गई है। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग भारत के अधिकांश परिवारों की रसोई में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का मतलब है कि हर महीने घर का बजट प्रभावित होगा। कई परिवार पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है। कमर्शियल सिलेंडर भी महंगा घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब है कि बाहर खाना भी अब पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है। ईरान-इजरायल तनाव का असर मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है। जब तेल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं। जनता की जेब पर असर एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ता है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से हर महीने घर का बजट प्रभावित होता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी समस्या बन सकती है। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच अब रसोई का खर्च और बढ़ जाएगा। मुरादाबाद की महिलाओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कई महिलाओं ने गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। Moradabad एक महिला ने कहा कि सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और पहले से ही कई तरह की आर्थिक समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि आमदनी कम है और खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अन्य गृहिणी ने भी कहा कि जब वे सिलेंडर लेने गईं तो पता चला कि कीमत बढ़ गई है। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने से परिवार का खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महंगाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। जब कमर्शियल सिलेंडर महंगा होता है तो होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा देते हैं। इसके अलावा छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में कई वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है। सरकार के सामने चुनौती एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी सरकार के लिए भी चुनौती बन सकती है क्योंकि महंगाई हमेशा एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा होती है। सरकार को एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ जनता को राहत देने की जिम्मेदारी भी होती है। भविष्य में क्या हो सकता है ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है तो तेल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम की देवी हैं. जानिए दूसरे दिन माता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, और शुभ योग के बारे में? Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं. मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में. मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ? मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए. 'ब्रह्मचारिणी' नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी. नवरात्र के दूसरे दिन खास योग! चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है. मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi) नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें. मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra) या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है. माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog) नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti) जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.
भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। देखिए तस्वीरें… NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया। NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन। विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो। सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है। 'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा' सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है। 'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों' सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा। आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया। डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया। कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.