लगातार दूसरे दिन खोई सोने-चांदी की चमक, चांदी 1300 रुपये फिसली; जानें आज आपके शहर का ताजा भाव
आसनसोल में दिखा जबरदस्त उत्साह, बोले नरेंद्र मोदी – बंगाल में विकास के लिए BJP को मिलेगा समर्थन
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- 'इजरायल कैंसर, बनाने वाले नर्क में जलेंगे', नेतन्याहू का आया तगड़ा जवाब
बांग्लादेश क्रिकेट में भूचाल, सरकार के हस्तक्षेप के बाद पूर्व क्रिकेटर बना BCB का नया अध्यक्ष
क्या वाकई कीड़ों को खत्म करता है बेकिंग सोडा? जानें प्याज के साथ इसके इस्तेमाल का सही तरीका
असम में BJP, पश्चिम बंगाल में कांटे की टक्कर, तमिलनाडु-केरल में किसको बढ़त? देखें लेटेस्ट ओपिनियन पोल का चौंकाने वाला अनुमान
सब्जी में गलती से पड़ गए ज्यादा मिर्च और नमक? ऐसे लौटा सकते हैं स्वाद
ईरान का सऊदी अरब की ‘रीढ़’ अल जुबैल पर हमला, इसके मायने क्या और दुनिया पर क्या होगा असर?
KKR के लिए आई खुशखबरी, मथीशा पथिराना की फिटनेस पर आया अपडेट, जानिए IPL के लिए कब आएंगे भारत?
एयर इंडिया का सफर महंगा, डोमेस्टिक-इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जेब पर पड़ेगा भारी बोझ
बिजनेस और इकोनॉमी

लगातार दूसरे दिन खोई सोने-चांदी की चमक, चांदी 1300 रुपये फिसली; जानें आज आपके शहर का ताजा भाव

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0
अंतर्राष्ट्रीय समाचार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- 'इजरायल कैंसर, बनाने वाले नर्क में जलेंगे', नेतन्याहू का आया तगड़ा जवाब

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0
ताज़ा खबरें

आसनसोल में दिखा जबरदस्त उत्साह, बोले नरेंद्र मोदी – बंगाल में विकास के लिए BJP को मिलेगा समर्थन

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0
कृषि में नए युग की शुरुआत 'पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026'

  कृषि में नए युग की शुरुआत: ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ जयपुर में आयोजित     राजस्थान की राजधानी जयपुर में 7 अप्रैल 2026, मंगलवार को आयोजित ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ ने देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और दिशा देने का काम किया। यह सम्मेलन किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और एग्री-टेक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने मिलकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर मंथन किया।   सम्मेलन में विशेष रूप से स्मार्ट फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, जैविक खेती, और डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे नई तकनीकों के माध्यम से फसल उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है और लागत को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और नई कृषि नीतियों की जानकारी भी दी गई, जिससे वे अपने व्यवसाय को और मजबूत बना सकें।   इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ना था। सम्मेलन में कई सफल किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे उन्होंने नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की। इससे अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली कि वे बदलाव को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।   ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ न केवल एक कार्यक्रम रहा, बल्कि यह किसानों के लिए एक ऐसा मंच साबित हुआ, जहां उन्हें सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। इस तरह के आयोजनों से निश्चित रूप से भारतीय कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और किसानों की समृद्धि का रास्ता और मजबूत होगा।   कृषि में नए युग की शुरुआत...'पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026'किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक तकनीक और नवाचार को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल। 🗓️ 7 अप्रैल 2026, मंगलवार 📍 जयपुर, राजस्थानआइए, साथ मिलकर खेती को और अधिक उन्नत, समृद्ध एवं लाभकारी बनाएं।@BhajanlalBjp @RajCMO… pic.twitter.com/jTVIxL4NoK— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) April 7, 2026

डिब्रूगढ़ रैली में उमड़ा जनसैलाब: असम में BJP-NDA को मिल रहा मजबूत समर्थन

  असम के डिब्रूगढ़ में आयोजित हालिया राजनीतिक रैली ने एक बार फिर राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को साफ कर दिया है। “The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA.” जैसे संदेशों ने इस बात को और मजबूत किया कि पूर्वोत्तर भारत में Bharatiya Janata Party और National Democratic Alliance की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। इस रैली में उमड़ी भीड़, कार्यकर्ताओं का जोश और नेतृत्व के प्रति समर्थन यह संकेत देता है कि असम में आगामी चुनावों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है।     📍 डिब्रूगढ़: राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र   Dibrugarh, जिसे असम की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है, इस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। चाय बागानों और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इस शहर में आयोजित रैली में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, हर वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया।   रैली स्थल पर सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग पार्टी के झंडे और बैनर लेकर पहुंचे। इससे साफ दिखा कि BJP-NDA के प्रति लोगों का विश्वास और समर्थन लगातार बढ़ रहा है।     🔥 रैली की ऊर्जा और जनसमर्थन   इस रैली की सबसे बड़ी खासियत रही इसकी “ऊर्जा”। मंच से दिए गए भाषणों के दौरान हर नारे पर भीड़ का उत्साह चरम पर था। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “BJP जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रैलियां सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि यह जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ और संगठन की मजबूती को भी दर्शाती हैं। डिब्रूगढ़ की यह रैली इसी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई।     🏛️ असम में BJP-NDA की मजबूत स्थिति   पिछले कुछ वर्षों में असम में BJP-NDA ने अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। राज्य में विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सामाजिक योजनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को सकारात्मक बनाया है।   प्रमुख कारण: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: सड़कों, पुलों और कनेक्टिविटी में सुधार सामाजिक योजनाएं: गरीब और मध्यम वर्ग के लिए योजनाओं का विस्तार सुरक्षा और स्थिरता: कानून-व्यवस्था में सुधार इन सभी कारणों ने मिलकर BJP-NDA को असम में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बना दिया है।     👥 नेतृत्व और संगठन की भूमिका   किसी भी रैली की सफलता उसके नेतृत्व और संगठन पर निर्भर करती है। इस रैली में भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही।   नेताओं ने अपने भाषणों में केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और आने वाले समय के लिए अपनी योजनाओं को जनता के सामने रखा। उन्होंने यह भी कहा कि असम के विकास के लिए BJP-NDA ही सबसे बेहतर विकल्प है।     🗳️ चुनावी रणनीति का हिस्सा   डिब्रूगढ़ की यह रैली सिर्फ एक जनसभा नहीं थी, बल्कि यह आगामी चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा भी थी। इस तरह की रैलियों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों को एकजुट करती है और नए मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करती है।   विशेषज्ञों के अनुसार, इस रैली का मुख्य उद्देश्य था: संगठन को मजबूत करना कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना विपक्ष को संदेश देना   ⚔️ विपक्ष के लिए चुनौती   BJP-NDA की इस मजबूत उपस्थिति ने विपक्षी दलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। जहां एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी उपलब्धियों के दम पर चुनावी मैदान में उतर रहा है, वहीं विपक्ष को अभी भी एकजुटता और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है।   डिब्रूगढ़ की रैली ने यह साफ कर दिया है कि मुकाबला आसान नहीं होने वाला है।     🌏 पूर्वोत्तर में बदलती राजनीति   पूर्वोत्तर भारत में पिछले कुछ वर्षों में राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले क्षेत्रीय दलों का दबदबा था, वहीं अब राष्ट्रीय पार्टियां भी मजबूत होती जा रही हैं। असम इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां BJP-NDA ने न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाई है।     📊 जनता का मूड क्या कहता है?   रैली में शामिल लोगों से बातचीत करने पर यह साफ हुआ कि वे विकास, रोजगार और स्थिरता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि वे सरकार के काम से संतुष्ट हैं और चाहते हैं कि विकास की यह गति जारी रहे। हालांकि कुछ लोगों ने स्थानीय समस्याओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चिंता भी जताई।     The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA. https://t.co/PssFXuyXrJ— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026

मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता।

  Raghav Chadha ने 4 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter (एक्स) पर एक पोस्ट साझा करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि वह पहले चुप रहना चाहते थे, लेकिन बार-बार दोहराए जा रहे “झूठ” को सच बनने से रोकने के लिए उन्हें सामने आना पड़ा।   “Three Allegations. Zero Truth.” शीर्षक के साथ उन्होंने एक विस्तृत जवाब जारी किया, जिसमें कथित तीन आरोपों का क्रमवार खंडन किया गया। इस बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार, भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गलत जानकारी फैलाने का उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है। यह बयान ऐसे समय आया है   जब राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है और सोशल मीडिया पर नेताओं के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है। उनके इस जवाब के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस और भी तेज हो गई है, जिससे यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।   मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता। Three Allegations. Zero Truth. My Response: pic.twitter.com/tPdjp04TLt — Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 4, 2026

📰 🇮🇳 ट्वीट के जरिए देशभक्ति का संदेश, चर्चा में Raghav Chadha

  आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Raghav Chadha का एक नया ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 3 अप्रैल 2026 को किए गए इस ट्वीट में उन्होंने केवल 🇮🇳 (भारतीय तिरंगा) का प्रतीक साझा किया, जिसके साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की गई है।   हालांकि ट्वीट में कोई विस्तृत संदेश नहीं लिखा गया, लेकिन तिरंगे के इस्तेमाल ने इसे खास बना दिया है। सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट को देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं।   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक ट्वीट अक्सर बड़े संदेश देने के लिए किए जाते हैं, खासकर ऐसे समय में जब देश में चुनावी माहौल या राजनीतिक गतिविधियां तेज होती हैं।   यह ट्वीट भी ऐसे ही समय में सामने आया है, जब देश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में Raghav Chadha का यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।     🇮🇳 pic.twitter.com/NfITxUKLVE— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 3, 2026

अंतर्राष्ट्रीय समाचार

View more
Popular post
MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

राज्य/शहर

  • भोपाल
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • बिहार
  • उत्तर प्रदेश
  • इंदौर
  • मुंबई
  • दिल्ली
  • भोपाल

खेल

Follow us

Recommended posts

बिजनेस और इकोनॉमी

लगातार दूसरे दिन खोई सोने-चांदी की चमक, चांदी 1300 रुपये फिसली; जानें आज आपके शहर का ताजा भाव

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0

Top week

राज्य/शहर

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0
विजुअल स्टोरीज़

राजनीति

मनोरंजन

लाइफस्टाइल और हेल्थ

बिजनेस और इकोनॉमी

कृषि समाचार

View more
देशभर में शुरू होंगी 5 रीजनल एग्रो-क्लाइमेटिक कॉन्फ्रेंस, राजस्थान से हुआ ऐतिहासिक आगाज़

  भारत में कृषि सुधार की नई पहल: रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस की शुरुआत राजस्थान से   केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हाल ही में किया गया एक महत्वपूर्ण ऐलान देश के कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter (अब X) पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत के अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन, विविध जलवायु, मिट्टी की संरचना, मौसम की परिस्थितियों और फसलों की भिन्नता को ध्यान में रखते हुए अब देशभर में पाँच रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इन कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को समझना, समाधान खोजना और कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त बनाना है। इस पहल की शुरुआत राजस्थान की पवित्र भूमि से की गई है, जिसे कृषि नवाचारों और पारंपरिक खेती के संगम के रूप में देखा जा रहा है।   भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। अलग-अलग राज्यों में जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता और वर्षा के पैटर्न में भारी अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं और धान की खेती प्रमुख है, जबकि दक्षिण भारत में चावल, नारियल और मसालों की खेती अधिक होती है। इसी तरह, पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों में बाजरा और दालें उगाई जाती हैं। ऐसे में एक समान कृषि नीति या रणनीति पूरे देश पर लागू करना प्रभावी नहीं हो सकता। यही कारण है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने क्षेत्रीय स्तर पर कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है।   इन रीजनल कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और अन्य संबंधित हितधारकों को एक मंच पर लाना है, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकें और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों का समाधान खोज सकें। इन सम्मेलनों में जल प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता, आधुनिक तकनीक का उपयोग, फसल विविधीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे इनका अधिकतम लाभ उठा सकें।   राजस्थान से इस पहल की शुरुआत करना भी एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है। राजस्थान का अधिकांश हिस्सा शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है, जहां जल संकट और मिट्टी की उर्वरता बड़ी चुनौतियां हैं। इसके बावजूद यहां के किसानों ने अपने अनुभव और नवाचारों के जरिए खेती को सफल बनाया है। ऐसे में यहां आयोजित पहली कॉन्फ्रेंस से अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीखने का अवसर मिलेगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जब नीतियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाई जाती हैं, तो उनका प्रभाव अधिक होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में पानी की कमी है, तो वहां सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा दिया जा सकता है। वहीं, जहां पानी की उपलब्धता अधिक है, वहां उच्च उत्पादकता वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा सकता है।   इसके अलावा, इन कॉन्फ्रेंस के जरिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को भी बढ़ावा मिलेगा। आज के दौर में ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कृषि में तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से किसान अपनी फसल की स्थिति का बेहतर आकलन कर सकते हैं और समय पर सही निर्णय ले सकते हैं। सरकार इन कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसानों को इन नई तकनीकों से परिचित कराने की योजना बना रही है।   जलवायु परिवर्तन भी आज कृषि के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अनियमित वर्षा, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर समाधान खोजना बेहद जरूरी हो गया है। इन कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपायों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जैसे कि जल संरक्षण, फसल बीमा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना।   किसानों के लिए बाजार तक पहुंच और उचित मूल्य मिलना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई बार किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। इन कॉन्फ्रेंस में कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन, ई-नाम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और वैल्यू एडिशन पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।   सरकार की इस पहल को देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में यह पहल भारत को कृषि के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बना सकती है।   अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन, जलवायु, मिट्टी, मौसम और अलग-अलग फसलों के लिए हमने यह तय किया कि अब रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। पूरे देश में ऐसी पाँच रीजनल कॉन्फ्रेंस होंगी। यह हमारा सौभाग्य है कि इनका शुभारंभ राजस्थान की इस पवित्र धरा से हो रहा है। pic.twitter.com/D7qDrM7xkP— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 7, 2026

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0

रायसेन में 11–13 अप्रैल 2026 तक लगेगा राष्ट्रीय कृषि मेला, आधुनिक तकनीकों से किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

यूपी में आज से शुरू MSP पर गेहूं की खरीद, यहां रजिस्ट्रेशन करें किसान

गर्मी, युद्ध और अब बार‍िश-ओलावृष्ट‍ि से खतरे में खेती, ट्र‍िपल अटैक से बेहाल क‍िसान

गर्मी, युद्ध और अब बार‍िश-ओलावृष्ट‍ि से खतरे में खेती, ट्र‍िपल अटैक से बेहाल क‍िसान

  देश के किसानों को इस साल फरवरी-मार्च में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की पैदावार में कमी, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा, और बेमौसम बारिश से तैयार फसलों को भारी नुकसान.     देश के किसानों पर एक ही महीने में तिहरी मार पड़ी है. मौसम में अचानक आए उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर और बेमौसम बारिश—इन तीनों ने मिलकर  लगभग हर प्रमुख फसल को प्रभावित कर दिया है. स्थिति ऐसी है कि अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी सभी फसलें किसी न किसी मोर्चे पर गंभीर दबाव में हैं. पूरे हालात से स‍िर्फ क‍िसान ही परेशान नहीं हैं बल्क‍ि केंद्र सरकार की भी टेंशन बढ़ गई है. पूरे हालात की समीक्षा के ल‍िए सरकार बैठक पर बैठक कर रही है. लेक‍िन सवाल यह है क‍ि इतने बड़े संकट को झेल रहे क‍िसानों के जख्म पर मरहम कौन लगाएगा?    सबसे बड़ी चिंता गेहूं को लेकर है. फरवरी-मार्च का समय गेहूं की भरपूर पैदावार के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि ने हीट स्ट्रेस की स्थिति बना दी. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उपज में कमी आने की आशंका है.   दूसरा बड़ा झटका पश्चिम एशिया की जंग से लगा है. इस संघर्ष के चलते समुद्री रूट डिस्टर्ब हो गए हैं और भारत के कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप हो गया है. बासमती चावल, प्याज, केला और अंगूर जैसे उत्पाद, जिनकी रमजान के दौरान पश्चिम एशिया में भारी मांग रहती है, इस बार उस बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. शिपिंग बंद होने से किसानों और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.   तीसरी और सबसे ताजा मार बेमौसम बारिश की है. देश के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है आलू, सरसों, प्याज और दालें—जो कटाई के बिल्कुल करीब थीं—अब खराब होने के खतरे में हैं. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है.   कुल मिलाकर, इस साल  की शुरुआत किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. मौसम, अंतरराष्ट्रीय हालात और प्राकृतिक मार के मिलेजुले प्रभाव ने देश की कृषि व्यवस्था को झकझोर दिया है.   फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी का गेहूं पर असरफरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी को लेकर करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने 'किसान तक' से कहा, पूरे हरियाणा में कोई नुकसान नहीं है और आगे भी किसी नुकसान की आशंका नहीं है.   देश के अन्य राज्यों की बात करें तो अक्तूबर अंत से दिसंबर अंत तक गेहूं की बुआई होती है. इस अलग-अलग स्टेज में मौसम के मुताबिक गेहूं की खेती होती है. अभी तक रात का तापमान अच्छा रहा है जो गेहूं की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए, गेहूं के उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. सबकुछ ठीक रहेगा.   बिहार में गेहूं की खेती पर क्या असर होगा? इसके जवाब में पूसा, बिहार के गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डीके सिंह ने कहा, जिस गेहूं की बुआई 15 दिसंबर के बाद हुई है, उस पर बुरा असर पड़ेगा. 10 से 20 दिसंबर के बीच बोई गई फसल पर आंशिक असर और नवंबर की खेती पर कोई असर नहीं होगा. डीके सिंह ने कहा, बिहार के अधिकांश जिलों में 10 से 20 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई है, इसलिए उत्पादन पर आंशिक असर हो सकता है. हालांकि जिन खेतों में अभी नमी है, उसका उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.    उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल रहेगा. बुंदेलखंड का इलाका गेहूं के लिए प्रमुख है, वहां गर्मी का असर देखा गया है. केवीके जालौन के अध्यक्ष और हेड डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि बुंदेलखंड में इन दिनों तापमान में बढ़ोतरी हुई है. जालौन में तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि झांसी में 40 डिग्री तक. ऐसे में बढ़ते तापमान का गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा.   लगातार 1 हफ्ते तक तापमान में बढ़ोतरी का असर गेहूं के बालियों के दानों पर पड़ता है. इससे दाने पतले हो जाते हैं. ऐसे में प्रति एकड़ उत्पादन में 5 से 7% गिरावट देखने को मिलेगी. जिन किसानों ने मार्च की शुरुआत में हल्की सिंचाई कर दी थी, उन पर असर कम दिखाई देगा.     गर्मी का सबसे अधिक असर पंजाब के मालवा क्षेत्र में देखा जा रहा है. संगरूर जिले के किसान हरजिंदर सिंह ने 'किसान तक' से कहा, फरवरी के अंतिम सप्ताह में तेज गर्मी पड़ी. अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं को भारी नुकसान पहुंचाया है. गेहूं के दाने में बदलाव आ गया. उस दौरान मौसम कुछ ठंडा रहता तो गेहूं के दाने फूलते, लेकिन अचानक गर्मी से दाना कमजोर रह गया. ठंड से जहां दाना बढ़ता है, वहीं गर्मी से दाने सिकुड़ते हैं. इससे गेहूं का वजन कम हो गया.   संगरूर में 16 एकड़ की खेती करने वाले हरजिंदर सिंह ने बताया कि इस बार प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल गेहूं का नुकसान होगा. यह असर केवल संगरूर तक सीमित नहीं नहीं बल्कि कई जिले चपेट में हैं. मानसा, पटियाला, बठिंडा, मलेर कोटला, मोगा और बरनाला जिलों में गेहूं को बहुत अधिक नुकसान है. मालवा पट्टी के जितने जिले हैं, जहां गेहूं की अधिक खेती होती है, वहां गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर कम रहेगा.    संगरूर जिले में लड्डी गांव के किसान जगतार सिंह ने बताया  पहले गर्मी ने गेहूं को नुकसान पहुंचाया और अब बारिश ने पूरा तबाह कर दिया. गेहूं की उपज में 30 फीसद तक गिरावट आ सकती है. प्रति एकड़ 4 क्विंटल तक कमी की आशंका है. जगतार सिंह ने कहा कि संगरूर जिले के लगभग सभी किसान गर्मी और बेमौसम बारिश से प्रभावित हुए हैं.    पंजाब से सटे हरियाणा में किसानों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी. वे बताते हैं कि हीट स्ट्रेस जैसी कोई समस्या नहीं है, लेकिन अचानक हुई बारिश ने गेहूं को नुकसान पहुंचाया है. किसानों ने बताया कि फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी से पहले ही गेहूं के दाने अपने फाइनल स्टेज में आ गए थे, इसलिए गर्मी का कोई असर नहीं नहीं होगा.   पश्चिम एशिया की लड़ाई किसानों पर भारी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत के निर्यात को बहुत प्रभावित किया है. बासमती चावल, प्याज, अंगूर, केला, आलू जैसी उपज का निर्यात ठप हो गया है. इसका सबसे अधिक नुकसान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को उठाना पड़ा है.    मिडिल ईस्ट भारत के कृषि निर्यात का बहुत बड़ा बाजार है. भारत से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल, प्याज, अंगूर, अनार और दालें खाड़ी देशों में भेजे  जाते हैं. ईरान, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात, इनमें प्रमुख बाजार हैं. लेकिन अब युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में बाधा आ गई है. जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, कंटेनर बंदरगाहों पर फंस रहे हैं और लॉजिस्टिक संकट पैदा हो गया है.   पंजाब बासमती राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (PBREA) के डायरेक्टर अशोक सेठी के अनुसार, मिडिल ईस्ट के देशों में बिरयानी की भारी लोकप्रियता के कारण भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यात इसी क्षेत्र में   होता है. यही वजह है कि यह इलाका भारतीय बासमती का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजार माना जाता है. लेकिन वर्तमान में इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने पूरे बासमती कारोबार को गहरे संकट में धकेल दिया है.   सेठी बताते हैं कि अधिकांश निर्यात उधार पर होता है, जिसके चलते बड़ी मात्रा में भुगतान अटका हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) के माध्यम से व्यापारियों को भुगतान की गारंटी उपलब्ध कराई जाए.    उनके मुताबिक, यदि निर्यात पूरी तरह बंद हो गया या कम हुआ, दोनों ही स्थितियों में किसानों को बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि निर्यात घटने से बासमती के दाम गिरेंगे और इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा. भुगतान में अड़चनों के चलते कई सौदों के रद्द होने की आशंका भी बढ़ गई है.   राजस्थान के बूंदी को बासमती का कटोरा कहा जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात खाड़ी देशों, विशेष रूप से ईरान और आसपास के क्षेत्रों में होता रहा है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से निर्यात गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं. व्यापारियों के अनुसार, जैसे ही युद्ध की स्थिति बनी, विदेशी खरीदारों ने ऑर्डर रोक दिए और नए सौदों से दूरी बना ली.   बासमती से बुरा हाल महाराष्ट्र के प्याज, केला और अंगूर का हुआ है. बीच रमजान में इन उपजों की मांग ठप हो गई. पूरे पश्चिम एशिया के देश भारत के कृषि उत्पादों पर निर्भर हैं, लेकिन लड़ाई ने सबकुछ चौपट कर दिया. रमजान और ईद के दौरान खाड़ी देशों में बढ़ने वाली केला मांग ने हमेशा महाराष्ट्र के जलगांव और मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के किसानों को अच्छी कमाई दिलाई है, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह उलट गए हैं.   ईरान–अमेरिकी लड़ाई के चलते खाड़ी देशों के रास्ते बंद होने, माल वापस लौट आने और जेबेल अली जैसे बड़े बंदरगाहों पर लोडिंग–अनलोडिंग रुक जाने से निर्यात प्रभावित हुआ है. हजारों टन केला खेतों, ट्रकों और कंटेनरों में फंसा है. कई खेप बीच रास्ते से वापस लौट रही है, जिससे किसानों पर भारी आर्थिक मार पड़ी है.   जुन्नर का नारंगा इलाका महाराष्ट्र में अंगूर का हब है. यहां से हजारों टन फल और सब्जियां दुनिया के कई देशों में एक्सपोर्ट होते हैं. हालिया घटनाक्रम के  बारे में किसान प्रकाश वाघ कहते हैं, रमजान का महीना है, लेकिन अंगूर किसानों में मायूसी है.   इस महीने अंगूर की सबसे अधिक सप्लाई पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के देशों में भेजी जाती है. मगर ईरान-अमेरिका की लड़ाई से सबकुछ ठप हो गया है. प्रकाश वाघ हर साल लगभग 50-60 क्विंटल अंगूर निर्यात करते हैं, लेकिन अभी तक 5-6 क्विंटल ही सप्लाई कर सके हैं. इस लड़ाई से उन्हें 50 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है.   बेमौसम बारिश से किसान और फसल तबाह जानकारों की मानें तो किसानों को जितना नुकसान हीट स्ट्रेस और लड़ाई से नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक मार्च महीने की बेमौसम बारिश ने कर दिया. देश का लगभग हर क्षेत्र बारिश से प्रभावित है. हरियाणा में करनाल के रहने वाले कमलदीप बताते हैं कि हालिया बारिश से गेहूं और लहसुन को बहुत नुकसान हुआ है. 13 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होनी है, लेकिन कटाई के आसपास ही बारिश होने से फसल को क्षति हुई है. गेहूं की फसल गिर गई है और लहसुन के खेत में पानी भर गया है. इससे किसानों पर तगड़ी मार पड़ी है.   हरियाणा में ही रेवाड़ी के देशराज चौहान बताते हैं, बारिश से सरसों, गेहूं, चना और ग्वार की फसल पर असर है. जिन किसानों ने अपनी सरसों , गेहूं, चना और ग्वार की फसल पर असर है. जिन किसानों ने अपनी सरसों मंडी में बेच दी है, उन्हें तो फायदा होगा, लेकिन जिनकी उपज मंडी में अभी तुली नहीं है वे बहुत नुकसान में हैं. कई किसानों की सरसों मंडी में बह गई, अब उनकी लागत भी नहीं निकल पाएगी.   बारिश और तेज हवा से गेहूं की फसल गिर गई है जिससे दाने कमजोर होंगे और उत्पादन गिर जाएगा. देशराज कहते हैं, खेतों में गिरी फसल को काटने का खर्च भी बढ़ेगा. अब मजदूरों को गेहूं को सुलझा कर काटना होगा जिससे समय बढ़ेगा. मजदूर कटाई के लिए पहले 5 हजार रुपये प्रति किल्ले मांगते थे, लेकिन अब 10 हजार रुपये मांगेंगे. इससे किसानों को डबल नुकसान होगा.    महाराष्ट्र  में भी बारिश से बहुत नुकसान है. अमरावती में ओलावृष्टि का कहर देखा गया है. यहां गेहूं, संतरा, तरबूज, नींबू-प्याज सहित कई फसलें बर्बाद हो गई हैं. तेज हवा और बारिश के साथ ओले गिरे हैं जिससे कटाई की कगार पर खड़ी रबी फसल तबाह हो गई है. किसानों ने मुआवजे की मांग तेज कर दी है.   कुल मिलाकर, देश के कई राज्यों के किसानों पर इस समय तिहरी मार पड़ी है—हीट स्ट्रेस से गेहूं प्रभावित हुआ, पश्चिम एशिया की लड़ाई के कारण बासमती सहित कई कृषि उत्पादों का निर्यात ठप पड़ा, और ऊपर से बेमौसम बारिश ने तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया. इन तीनों संकटों का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है. 

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0

धर्म और अध्यात्म

View more
वैशाख अमावस्या 16 या 17 अप्रैल कब ? स्नान-दान का मुहूर्त, पितृ पूजा किस दिन करें

  Vaishakh Amavasya 2026: आत्मशुद्धि, पितृ तृप्ति और पुण्य संचय का महापर्व   हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या को अत्यंत पवित्र और फलदायी तिथि माना जाता है। वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी, जबकि पंचांग के अनुसार इसकी तिथि 16 अप्रैल की रात 08:11 बजे शुरू होकर 17 अप्रैल की शाम 05:21 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 17 अप्रैल को इसका पालन करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।   पुराणों, विशेष रूप से स्कंद पुराण में वर्णित है कि जो व्यक्ति वैशाख मास की अमावस्या पर श्रद्धा और नियमपूर्वक स्नान व दान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से पापों का नाश होता है और आत्मा की शुद्धि होती है। इसके साथ ही पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।   धार्मिक दृष्टि से इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। व्रत रखकर विष्णु पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसके अलावा पीपल के पेड़ की पूजा भी अत्यंत शुभ मानी जाती है, क्योंकि उसमें त्रिदेवों का वास माना जाता है। शाम के समय पीपल के नीचे या नदी किनारे दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।   वैशाख अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र, फल, छाता और दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाना और सात्विक जीवन अपनाना व्यक्ति के जीवन में शुभ फल लेकर आता है। यह दिन आत्मशुद्धि, सेवा और भक्ति के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का उत्तम अवसर प्रदान करता है।  

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0

हनुमान जयंती पर पढ़ें ये पावन कथा, जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबली

अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

आज सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी का संयोग, पूजा का मुहूर्त, पूरा पंचांग देखें ?

अप्रैल-मई में शादी के शुभ दिन! जानें सही समय और तिथियां, कहीं चूक न जाएं!

  muhurat for marriage in april and may 2026:  14 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास रहने वाला है.   ऐसे में खरमास खत्म होने के बाद एक बार फिर से शादियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा.   जानिए अप्रैल और मई के मुहूर्त?     Shubh muhurat for marriage in april and may 2026: हिंदू धर्म में खरमास के दौरान किसी भी तरह के नए या शुभ कार्य करने की मनाही होती है. 14 मार्च से खरमास शुरू होकर 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा. यह वह महीना होता है, जब शुभ कार्यों से बचना चाहिए. खरमास के दौरान लोग शादी, सगाई, रोका समारोह और इसी तरह के अन्य खास आयोजन नहीं करते हैं.   इन दिनों को ऐसे बड़े आयोजनों की योजना बनाने के लिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि सूर्य वर्तमान में मीन राशि में गोचर कर रहा है.    नवजोड़ों के लिए शादी का शुभ मुहूर्त   शादी, सगाई, विशेषकर शादी करने वाले सबसे महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, और वे इन आयोजनों की योजना पहले से ही बना लेते हैं. हम उन नए जोड़ों की भी मदद कर रहे हैं, जिन्होंने अभी-अभी रोका, सगाई और शादी की योजना बनाई है और अगले महीने सगाई करना चाहते हैं, या यूं कहें कि यह आखिरी समय का आयोजन है.   उनके लिए आखिरी समय में सब कुछ संभालना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हम उन्हें उनके खास दिन के लिए शुभ मुहूर्त के साथ सही समय चुनने में मदद कर रहे हैं.   अप्रैल 2026 माह में विवाह शुभ मुहूर्त   तारीख  मुहूर्त नक्षत्र  तिथि 15 अप्रैल 2026, बुधवार दोपहर 3.22 से रात 10.31 तक  उत्तरा भाद्रपद त्रयोदाशी 20 अप्रैल 2026, सोमवार सुबह 5:51 बजे से शाम 5:49 बजे तक रोहिणी तृतीया, चतुर्थी 21 अप्रैल 2026, मंगलवार सुबह 5:50 से दोपहर 12:31 तक मृगशिरा पंचमी 25 अप्रैल 2026, शनिवार 26 अप्रैल, सुबह 2:10 से 5:45 बजे तक माघ दशमी 27 अप्रैल 2026, सोमवार रात 9:18 से रात 9:36 तक उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वा फाल्गुनी द्वादशी 28 अप्रैल 2026, मंगलवार 29 अप्रैल, रात 9:04 से सुबह 5:42 तक उत्तरा फाल्गुनी, हस्त त्रयोदाशी 29 अप्रैल 2026, बुधवार सुबह 5:42 बजे से रात 8:52 बजे तक हस्त त्रयोदशी, चतुर्दशी     मई 2026 में विवाह शुभ मुहूर्त     तारीख मुहुर्त नक्षत्र तिथि 1 मई 2026, शुक्रवार सुबह 10:00 बजे से रात 9:13 बजे तक स्वाति पूर्णिमा 3 मई 2026, रविवार सुबह 7:10 से रात 10:28 तक अनुराधा द्वितीय 5 मई 2026, मंगलवार शाम 7:39 से सुबह 5:36 तक, 6 मई मुला चतुर्थी 6 मई, 2026, बुधवार सुबह 5:36 से दोपहर 3:54 तक मुला चतुर्थी, पंचमी 7 मई, 2026, गुरुवार शाम 6:46 से सुबह 5:35 तक, 8 मई उत्तरा आषाढ़ा षष्ठी 8 मई 2026, शुक्रवार सुबह 5:35 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक उत्तरा आषाढ़ा षष्ठी 13 मई 2026, बुधवार 14 मई, रात 8:55 से सुबह 5:31 बजे तक उत्तरा भाद्रपद, रेवती द्वादशी 14 मई 2026, गुरुवार सुबह 5:31 बजे से शाम 4:59 बजे तक रेवती द्वादशी, त्रयोदशी       Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि metroheadlines.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Metroheadlines मार्च 28, 2026 0

महाअष्टमी पर PM Modi समेत कई राजनेताओं ने X पर दिया संदेश, महागौरी से की शक्ति-समृद्धि की प्रार्थना ?

अष्टमी-नवमी कब है कन्या पूजन? जानें महत्व, पूजा विधि और हर उम्र की कन्या का फल!

नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता की पूजा से बच्चों में बढ़ती है एकाग्रता! जानें विधि, मंत्र, भोग

Happy Cheti Chand 2026 Wishes: चेटी चंड 20 मार्च 2026 आज झूलेलाल जयंती मनाई जा रही है.

    भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव पर सिंधी प्रियजनों को ये मैसेज भेजकर शुभकामनाएं दें.   Happy Cheti Chand 2026 Wishes: आज चेटीचंड है, इसे झूलेलाल जयंती भी कहते हैं. इस मौके पर आप भी अपनों को चेटी चंड की शुभकामनाएं भेज सकते हैं. आर्टिकल में झूलेलाल जंयती की अनेक शुभकामनाएं हम आपके लिए लेकर आए हैं. उससे पहले इस दिन का महत्व जान लें. चेटी चंड का दिन भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जन्म लिया और अपने भक्तों को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई. भगवान झूलेलाल को जल का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन जल की पूजा की जाती है. यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व है.   सिंधी समाज का नया साल इसी दिन से शुरू होता है. इसलिए इसे नए आरंभ और नई उम्मीदों का प्रतीक माना जाता है. भक्तजन भगवान झूलेलाल की प्रतिमा की पूजा करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इस दिन “बहराना साहिब” निकाला जाता है, जिसमें दीप, फल, नारियल और कलश सजाकर जल के पास ले जाया जाता है.   जल के देव भगवान झूलेलाल आपकी हर मनोकामना पूरी करें, आपके जीवन में खुशियों की लहरें लाएं. चेटीचंड की शुभकामनाएं   आओ मिलकर मनाएं खुशियों का त्योहार, झूलेलाल जी करें सबका उद्धार. आपके जीवन में खुशियां हों अपार झूलेलाल जयंती की शुभकामनाएं   नए साल की नई शुरुआत, खुशियों की बरसात हो, हर दिन आपका खास हो. चेटी चंड की शुभकामनाएं   जय झूलेलाल” की गूंज से हर दिल में उमंग छाए, भगवान झूलेलाल की कृपा से आपका जीवन सुखमय बन जाए   झूलेलाल जी का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ बना रहे, हर दिन खुशियों से भरा रहे. चेटीचंड की शुभकामनाएं   आपका जीवन दीप की तरह हमेशा उज्जवल और खुशहाल रहे। चेटी चंड मंगलमय हो.   भगवान झूलेलाल से प्रार्थना है कि आपके जीवन में उनके  आशीष से सदैव सुख, शांति और भाईचारा स्थापित रहे. झूलेलाल जयंती की शुभकामनाएं   झूलेलाल जी का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ बना रहे. आपका हर दिन मंगलमय हो. चेटी चंड की शुभकामनाएं.   झूलेलाल जी की कृपा से आपके सभी सपने पूरे हों, और जीवन में खुशियां ही खुशियां हों. चेटी चंड की ढेरों शुभकामनाएं.   Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ

चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 या 18 मार्च कब ? शिव पूजा का मुहूर्त देखें

Premanand Maharaj ने बताया भूत कैसे बदलते हैं रूप? जानें डर के पीछे का चौकानें वाला सच?

  Premanand Maharaj: भूत प्रेत का नाम सुनते ही अक्सर लोग डरने लगते हैं. कई लोग जानना चाहते हैं कि, भूत आखिर कैसे दिखते हैं और क्या वो सच में इंसानों के पास आ सकते हैं? संत प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?   Premanand Maharaj: भूत-प्रेत का विषय सालों से लोगों के मन में भय और जिज्ञासा दोनों पैदा करता रहा है. कई लोग यह जानना चाहते हैं कि, भूत आखिर दिखते कैसे हैं और क्या सच में वे इंसानों के सामने आ सकते हैं.   संत महात्माओं के मुताबिक भूतों का स्वरूप स्थिर नहीं होता, बल्कि वे पल-पल में अपना रूप बदलते रहते हैं. यही वजह है कि, उन्हें पहचानना आसान नहीं होता.    Premanand Maharaj मुझे भूतों का राजा बनना है प्रेमानंद महाराज से पूछा अजीब सवाल तो मिला ये जवाब   भूतों का रूप लगातार बदलता रहता है!   संतों के मुताबिक भूत किसी एक निश्चित आकृति में नहीं रहते. वे हर पल अपना रूप बदल सकते हैं. कभी वे स्त्री या पुरुष के रूप में दिखाई देते हैं, तो अगले ही क्षण उनका रूप अत्यंत भयावह और वीभत्स हो सकता है.  कभी वे सामान्य और परिचित स्वरूप में दिखाई देते हैं, तो कभी अचानक अत्यंत सुंदर या फिर डरावना रूप धारण कर लेते हैं.    यही कारण है कि भूतों का पहचानना आसान नहीं होता, क्योंकि उनकी आकृति हमेशा बदलती रहती है.    अधोहकि को प्राप्त जीवन बन जाते हैं भूतधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब किसी जीवन को अपने कर्मों के कारण अधोगति प्राप्त होती है, तो वह भूत योनि में चला जाता है. ऐसे जीवन अत्यंत कष्टदायक अवस्था में रहते हैं. कहा जाता है कि, भूत योनि में रहने वाले जीवों की स्थिति बहुत कठिन होती है. उनके सामने नदियां बहती रहती हैं, लेकिन वे एक बूंद पानी भी नहीं पी सकते हैं. भोजन उनके सामने होता है, लेकिन वे उसे खा नहीं सकते. वे केवल वायु के सहारे रहते हैं.    भूत इंसानों के पास क्यों आते हैं?   मान्यताओं के मुताबिक भूत हर व्यक्ति के पास नहीं जाते. वे सिर्फ वहां जाते हैं, जहां उन्हें लगता है कि, उनके दुख का समाधान हो सकता है.  यदि किसी संत या साधु के पास जाने से उन्हें मुक्ति या कल्याण की आशा होती है, तो वे उनके पास प्रकट होते हैं. संतों की कृपा या संकल्प से उन्हें मुक्ति मिलने की उम्मीद मानी जाती है.    भूतों का प्रभाव किन लोगों पर होता है?   धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भूतों का प्रभाव मुख्यत: उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जो तमोगुण से प्रभावित होते हैं.  जो लोग गलत आचरण करते हैं, अपवित्र कर्मों में लगे रहते हैं या तंत्र-मंत्र जैसी चीजों का गलत इस्तेमाल करते हैं, उनके ऊपर भूत-प्रेत का प्रभाव होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है. ऐसे लोगों के शरीर पर भूत होकर अपने कष्टों को कम करने की कोशिस करता है.   भगवान का नाम लेने से दूर रहते हैं भूत!   संतों के मुताबिक भूत-प्रेत उन लोगों के पास नहीं आते हैं, जो भगवान का नाम जपते हैं और ईश्वर की भक्ति में लगे रहते हैं.  मान्यता है कि, जहां भगवान का नाम, मंत्र जप या भक्ति होती है, वहां भूत-प्रेत का प्रभाव नहीं होता है. ईश्वर के नाम में इतनी शक्ति मानी जाती है कि, नकारात्मक शक्तियां उसके पास टिक नहीं पातीं.    भूतों से क्यों डरना नहीं चाहिए?   धार्मिक शिक्षाओं के मुताबिक, भूत-प्रेत से डरने की जरूरत नहीं है. यदि व्यक्ति ईश्वर का स्मरण करता है, भगवान का नाम का जाप करते हैं और अच्छे कर्म करता है, तो उसे किसी तरह की नकारात्मक शक्ति से भय नहीं रहता.    इसलिए संत हमेशा यही सलाह देते हैं कि, भय से बचने का सबसे सरल उपाय है, भगवान का नाम लेना और सकारात्मक जीवन को जीना है.   Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि metroheadlines.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  

Metroheadlines मार्च 14, 2026 0

भूतड़ी अमावस्या कब है ? बुरी बलाओं से बचने के लिए इस दिन करें ये खास काम

Chaitra Navratri 2026: खरमास में चैत्र नवरात्रि, क्या घर, वाहन खरीदी, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं ?

T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद नरेंद्र मोदी का मोटिवेशनल कोट चर्चा में, दिया जीत का मंत्र

करियर और शिक्षा

View more
बिहार बोर्ड ने बढ़ाई इंटर कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन की तारीख, नंबर बढ़वाने का आखिरी मौका

  Bihar Board 12th Compartment Exam 2026 : इस साल 12वीं बोर्ड की परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक हुई थी. जिसमें कुल 13.17 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया.     Bihar Board 12th Compartment Exam 2026 : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) ने 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक जरूरी अपडेट जारी किया है. इस साल 12वीं बोर्ड की परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक हुई थी. जिसमें कुल 13.17 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया, इसमें 6.75 लाख छात्राएं और 6.42 लाख छात्र शामिल थे. 23 मार्च 2026 को रिजल्ट घोषित किया गया और इस साल 85.19 प्रतिशत छात्र पास हुए.   हालांकि, कुछ छात्र ऐसे भी हैं जो किसी एक या दो विषयों में फेल हो गए या अपने नंबर बढ़ाना चाहते हैं. ऐसे छात्रों के लिए बीएसईबी ने इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल और विशेष परीक्षा का आयोजन किया है. बोर्ड ने अब इन परीक्षाओं के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दिया है.  छात्र अब भी अपना साल बचाने का मौका पा सकते हैं .      कंपार्टमेंटल परीक्षा और विशेष परीक्षा क्या है?   कंपार्टमेंटल परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जो किसी एक या दो विषयों में फेल हो गए हों. इस परीक्षा में बैठकर छात्र अपना साल बचा सकते हैं और पासिंग नंबर हासिल कर सकते हैं. यह छात्रों को दूसरा मौका देती है ताकि उनका अकादमिक करियर प्रभावित न हो. विशेष परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जो किसी कारण के मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए. यह परीक्षा आमतौर पर कंपार्टमेंटल परीक्षा के साथ आयोजित की जाती है. दोनों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अपना साल बचाने का मौका देना है.      आवेदन की लास्ट डेट क्या है   बीएसईबी ने आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी है. परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक छात्रों को अपने स्कूल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा. बिहार बोर्ड की कंपार्टमेंटल और विशेष परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को परीक्षा देने के लिए कुल 260 रुपये का शुल्क देना होगा, जबकि कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए आवेदन शुल्क अलग से 150 रुपये तय किया गया है.    आवेदन कैसे करें   1. इसके लिए सबसे पहले अपने स्कूल के माध्यम से बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट intermediate.biharboardonline.com पर जाएं. 2. इसके बाद कंपार्टमेंट परीक्षा के लिंक पर क्लिक करें. 3. अब रोल कोड और रोल नंबर जैसी जरूरी जानकारी भरें. 4. जानकारी भरने के बाद तय फीस का भुगतान करें.  5. लास्ट में फॉर्म सबमिट कर दें. 

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0

छात्रों का इंतजार खत्म, CBSE बोर्ड 10वीं का रिजल्ट इस तारीख को हो सकता है जारी

बच्चा या टीचर गैरहाजिर तो पैरेंट्स को जाएगा SMS, पंजाब के स्कूलों में 1 अप्रैल से नई व्यवस्था

राजस्थान बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जल्द, जानें कब और कैसे देखें अपना स्कोर

12वीं के बाद क्या चुनें? ये ट्रेंडिंग कोर्स दिलाएंगे शानदार करियर आप्शन....?

  Best Courses After 12th: 12वीं के रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपने भविष्य को लेकर सोच में पड़ जाते हैं.यहां जानिए 10 ऐसे कोर्स जिनमें एडमिशन लेकर आप अच्छा करियर और बढ़िया सैलरी हासिल कर सकते हैं.   इन दिनों देशभर में 12वीं के बोर्ड रिजल्ट तेजी से जारी हो रहे हैं. जैसे ही रिजल्ट आता है, ज्यादातर छात्रों के मन में यही सवाल होता है कि अब आगे क्या करें. सही कोर्स का चुनाव ही आपके करियर की दिशा तय करता है.आज के समय में सिर्फ पारंपरिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कई ऐसे नए और हाई डिमांड वाले कोर्स मौजूद हैं जिनमें एडमिशन लेकर छात्र अच्छा भविष्य बना सकते हैं.अगर आपने भी 12वीं पास कर ली है, तो आप इन कोर्स में रजिस्ट्रेशन करके अपने करियर की नई शुरुआत कर सकते हैं.   अगर आपको कंप्यूटर, ऐप या टेक्नोलॉजी में रुचि है तो बीटेक कंप्यूटर साइंस आपके लिए बेहतरीन है. इसमें कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सिखाया जाता है इस कोर्स के बाद आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर या डेटा साइंटिस्ट बन सकते हैं और अच्छी सैलरी पा सकते हैं.   मशीनों और ऑटोमोबाइल में दिलचस्पी रखने वाले छात्रों के लिए बीटेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) शानदार विकल्प है. इसमें मशीन डिजाइन, प्रोडक्शन और टेक्निकल काम सिखाया जाता है. इस कोर्स के बाद ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरी मिल सकती है.   अगर आपका सपना हवाई जहाज या स्पेस टेक्नोलॉजी में काम करने का है, तो बीटेक (एयरोस्पेस इंजीनियरिंग) चुन सकते हैं. इसमें विमान और रॉकेट से जुड़ी पढ़ाई होती है. इस क्षेत्र में करियर बनाकर आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम कर सकते हैं.   मोबाइल, नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कैसे काम करते हैं, यह इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में सिखाया जाता है. 5G और नई टेक्नोलॉजी के चलते इस फील्ड में जॉब के मौके लगातार बढ़ रहे हैं.   अगर आप आईटी फील्ड में जाना चाहते हैं लेकिन इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते, तो BCA (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन) अच्छा विकल्प है. इसमें प्रोग्रामिंग और वेब डेवलपमेंट सिखाया जाता है. इसके बाद आप सॉफ्टवेयर या ऐप डेवलपर बन सकते हैं.   मैनेजमेंट और बिजनेस में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए BBA (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) बढ़िया है.इसमें मार्केटिंग, फाइनेंस और बिजनेस स्किल्स सिखाई जाती हैं.आगे चलकर एमबीए करके बड़े पदों पर नौकरी पाई जा सकती है.  

Metroheadlines मार्च 26, 2026 0

रिंकू सिंह बने रीजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर, कितनी मिलेगी सैलरी? जानिए पूरी डिटेल

बिना परीक्षा कंडक्टर बनने का मौका, UPSRTC भर्ती में महिलाओं के लिए सुनहरा अवसर

इंतजार खत्म होने वाला है, शिक्षा मंत्री ने बताई राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट की तारीख!

राजस्थान बोर्ड कल जारी करेगा 10वीं क्लास का रिजल्ट, ऐसे कर सकेंगे चेक ?

  राजस्थान बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जल्द जारी होने वाला है. छात्र वेबसाइट, SMS और DigiLocker के जरिए अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. जानें कैसे करें चेक ?     SMS के जरिए ऐसे पाएं रिजल्ट अगर वेबसाइट स्लो हो जाए या खुल न रही हो, तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट देख सकते हैं. मोबाइल में मैसेज बॉक्स खोलें और टाइप करें RJ10 स्पेस रोल नंबर. इसे 5676750 या 56263 पर भेज दें. कुछ ही समय में रिजल्ट आपके मोबाइल पर आ जाएगा.   DigiLocker से कैसे चेक करें छात्र DigiLocker ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करके भी अपनी मार्कशीट देख सकते हैं. इसके लिए DigiLocker में लॉगिन करें और RBSE सेक्शन में जाकर 10वीं का रिजल्ट चुनें. यहां से आप अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं.   पास होने के लिए कितने नंबर जरूरी? RBSE 10वीं परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को हर विषय में और कुल मिलाकर कम से कम 33% अंक लाने जरूरी हैं. इससे कम अंक होने पर छात्र को फेल माना जाएगा.   पिछले साल का रिजल्ट कैसा रहा? पिछले साल यानी 2025 में RBSE 10वीं का रिजल्ट 28 मई को जारी हुआ था. उस साल कुल पास प्रतिशत लगभग 93.03% रहा था. लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा था और उनका पास प्रतिशत ज्यादा था.   अगर फेल हो जाएं तो क्या करें? अगर कोई छात्र एक या दो विषय में फेल हो जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. बोर्ड द्वारा कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित की जाती है, जिससे छात्र उसी साल पास हो सकता है.लेकिन अगर दो से ज्यादा विषयों में फेल होते हैं, तो फिर पूरे साल की पढ़ाई दोबारा करनी पड़ सकती है.   क्या री-एवैल्यूएशन का विकल्प है? अगर किसी छात्र को अपने नंबरों पर संदेह है, तो वह रिजल्ट जारी होने के बाद री-एवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता है. इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध रहती है.

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0

SECL में निकली भर्ती, युवा कैंडिडेट्स ऐसे कर सकते हैं अप्लाई, ये है लास्ट डेट

यूपी बोर्ड में पहली बार स्टेप मार्किंग से मिलेंगे नंबर, 18 मार्च से चेक होंगी कॉपियां

MDS 2026 के लिए आवेदन शुरू, डेंटल पीजी में दाखिले का मौका; 30 मार्च तक करें रजिस्ट्रेशन

NEET UG 2026: आवेदन फॉर्म में गलती सुधारने का मौका, 14 मार्च तक खुली करेक्शन विंडो; फटाफट करें फॉर्म चेक

  NEET UG 2026 के लिए आवेदन कर चुके छात्रों को अब अपने फॉर्म में सुधार करने का मौका मिल गया है. NTA ने correction window खोल दी है, जो 14 मार्च 2026 रात 11:50 बजे तक खुली रहेगी.जानें   अगर आपने NEET UG 2026 के लिए आवेदन किया है और फॉर्म भरते समय कोई गलती हो गई है, तो आपके लिए राहत भरी खबर है. NTA ने NEET UG 2026 के आवेदन फॉर्म में सुधार करने के लिए करेक्शन विंडो खोल दी है.अब उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने फॉर्म में जरूरी बदलाव कर सकते हैं.   जिन उम्मीदवारों ने पहले ही आवेदन कर दिया है, वे अब अपने फॉर्म में हुई किसी भी गलती को ठीक कर सकते हैं. कई बार फॉर्म भरते समय जल्दबाजी में या जानकारी सही से न होने की वजह से कुछ गलतियां हो जाती हैं. ऐसे में NTA छात्रों को सुधार का मौका देता है ताकि आगे एडमिशन के समय कोई परेशानी न हो करेक्शन विंडो अभी खुल चुकी है और 14 मार्च 2026 रात 11:50 बजे तक उपलब्ध रहेगी.इसके बाद फॉर्म में किसी भी तरह का बदलाव करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपने आवेदन फॉर्म को ध्यान से जांच लें और अगर कोई गलती है तो उसे तुरंत ठीक कर लें.   कब होगी NEET UG 2026 परीक्षा NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए देश के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश मिलता है. NTA के अनुसार, NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की जाएगी. परीक्षा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा.यह परीक्षा ऑफलाइन यानी पेन और पेपर मोड में आयोजित होगी. देशभर के कई शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, वहीं कुछ केंद्र विदेशों में भी होंगे ताकि वहां रहने वाले छात्र भी आसानी से परीक्षा दे सकें.

Metroheadlines मार्च 13, 2026 0

यूपीएससी की फर्जी रैंक वाला मामला

पिता के संघर्ष का रंग लाया सपना, यूपी के ने CA परीक्षा में रच दी नई कहानी

गणित के पेपर का QR कोड स्कैन करते ही बज उठा मशहूर गाना, CBSE परीक्षा में सामने आया हैरान करने वाला मामला