नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से भारतीय सीमा के साथ ही नेपाल में भी बवाल मचना शुरू हो गया है. नेपाली पार्टियों ने भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध किया है.
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से पड़ोसी देश में नया तूफान खड़ा हो गया है. नेपाल पुलिस ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है. बालेन सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए.
दरअसल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है. नेपाल के इस कदम से बॉर्डर के पास मौजूद भारतीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है.
भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सख्ती
इसके अलावा भारतीय सीमा से लगे मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों की आवाजाही पर भी सख्ती हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों का बिना इजाजत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है. नेपाल में राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सख्त नियमों के चलते भारत संग लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बिगड़ने का खतरा है.
क्या कह रहीं नेपाली पार्टियां
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत बड़े राजनीतिक दलों ने 12 अप्रैल को भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें मांग की गई कि ऐसी गाड़ियों को पहले की तरह बॉर्डर के 30 किलोमीटर के दायरे में आजादी से चलने दिया जाए.
अधिकारी ने क्या बताया
नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद कानूनों को लागू करना है. काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के बावजूद इनका पालन नहीं हो रहा है.
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर काठमांडू टाइम्स से बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देते थे और महीनों तक गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. अब ऐसा नहीं होगा. हालांकि इन गाड़ियों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अंदाजा है कि मधेश प्रांत के 8 जिलों में 10,000 से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियां चल रही होंगी. बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खरीदते हैं.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। देखिए तस्वीरें… NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया। NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन। विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो। सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है। 'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा' सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है। 'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों' सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा। आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया। डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया। कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से भारतीय सीमा के साथ ही नेपाल में भी बवाल मचना शुरू हो गया है. नेपाली पार्टियों ने भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध किया है. नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से पड़ोसी देश में नया तूफान खड़ा हो गया है. नेपाल पुलिस ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है. बालेन सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए. दरअसल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है. नेपाल के इस कदम से बॉर्डर के पास मौजूद भारतीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सख्ती इसके अलावा भारतीय सीमा से लगे मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों की आवाजाही पर भी सख्ती हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों का बिना इजाजत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है. नेपाल में राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सख्त नियमों के चलते भारत संग लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बिगड़ने का खतरा है. क्या कह रहीं नेपाली पार्टियां नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत बड़े राजनीतिक दलों ने 12 अप्रैल को भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें मांग की गई कि ऐसी गाड़ियों को पहले की तरह बॉर्डर के 30 किलोमीटर के दायरे में आजादी से चलने दिया जाए. अधिकारी ने क्या बताया नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद कानूनों को लागू करना है. काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के बावजूद इनका पालन नहीं हो रहा है. एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर काठमांडू टाइम्स से बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देते थे और महीनों तक गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. अब ऐसा नहीं होगा. हालांकि इन गाड़ियों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अंदाजा है कि मधेश प्रांत के 8 जिलों में 10,000 से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियां चल रही होंगी. बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खरीदते हैं.
असम के डिब्रूगढ़ में आयोजित हालिया राजनीतिक रैली ने एक बार फिर राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को साफ कर दिया है। “The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA.” जैसे संदेशों ने इस बात को और मजबूत किया कि पूर्वोत्तर भारत में Bharatiya Janata Party और National Democratic Alliance की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। इस रैली में उमड़ी भीड़, कार्यकर्ताओं का जोश और नेतृत्व के प्रति समर्थन यह संकेत देता है कि असम में आगामी चुनावों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। 📍 डिब्रूगढ़: राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र Dibrugarh, जिसे असम की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है, इस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। चाय बागानों और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इस शहर में आयोजित रैली में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, हर वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया। रैली स्थल पर सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग पार्टी के झंडे और बैनर लेकर पहुंचे। इससे साफ दिखा कि BJP-NDA के प्रति लोगों का विश्वास और समर्थन लगातार बढ़ रहा है। 🔥 रैली की ऊर्जा और जनसमर्थन इस रैली की सबसे बड़ी खासियत रही इसकी “ऊर्जा”। मंच से दिए गए भाषणों के दौरान हर नारे पर भीड़ का उत्साह चरम पर था। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “BJP जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रैलियां सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि यह जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ और संगठन की मजबूती को भी दर्शाती हैं। डिब्रूगढ़ की यह रैली इसी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई। 🏛️ असम में BJP-NDA की मजबूत स्थिति पिछले कुछ वर्षों में असम में BJP-NDA ने अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। राज्य में विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सामाजिक योजनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को सकारात्मक बनाया है। प्रमुख कारण: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: सड़कों, पुलों और कनेक्टिविटी में सुधार सामाजिक योजनाएं: गरीब और मध्यम वर्ग के लिए योजनाओं का विस्तार सुरक्षा और स्थिरता: कानून-व्यवस्था में सुधार इन सभी कारणों ने मिलकर BJP-NDA को असम में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बना दिया है। 👥 नेतृत्व और संगठन की भूमिका किसी भी रैली की सफलता उसके नेतृत्व और संगठन पर निर्भर करती है। इस रैली में भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही। नेताओं ने अपने भाषणों में केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और आने वाले समय के लिए अपनी योजनाओं को जनता के सामने रखा। उन्होंने यह भी कहा कि असम के विकास के लिए BJP-NDA ही सबसे बेहतर विकल्प है। 🗳️ चुनावी रणनीति का हिस्सा डिब्रूगढ़ की यह रैली सिर्फ एक जनसभा नहीं थी, बल्कि यह आगामी चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा भी थी। इस तरह की रैलियों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों को एकजुट करती है और नए मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रैली का मुख्य उद्देश्य था: संगठन को मजबूत करना कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना विपक्ष को संदेश देना ⚔️ विपक्ष के लिए चुनौती BJP-NDA की इस मजबूत उपस्थिति ने विपक्षी दलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। जहां एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी उपलब्धियों के दम पर चुनावी मैदान में उतर रहा है, वहीं विपक्ष को अभी भी एकजुटता और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है। डिब्रूगढ़ की रैली ने यह साफ कर दिया है कि मुकाबला आसान नहीं होने वाला है। 🌏 पूर्वोत्तर में बदलती राजनीति पूर्वोत्तर भारत में पिछले कुछ वर्षों में राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले क्षेत्रीय दलों का दबदबा था, वहीं अब राष्ट्रीय पार्टियां भी मजबूत होती जा रही हैं। असम इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां BJP-NDA ने न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। 📊 जनता का मूड क्या कहता है? रैली में शामिल लोगों से बातचीत करने पर यह साफ हुआ कि वे विकास, रोजगार और स्थिरता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि वे सरकार के काम से संतुष्ट हैं और चाहते हैं कि विकास की यह गति जारी रहे। हालांकि कुछ लोगों ने स्थानीय समस्याओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चिंता भी जताई। The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA. https://t.co/PssFXuyXrJ— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026
Kerala की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘Mera Booth, Sabse Mazboot Samvaad’ कार्यक्रम के दौरान Narendra Modi ने राज्य में वर्षों से सत्ता में रही Left Democratic Front (LDF) और United Democratic Front (UDF) पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि LDF और UDF के लंबे समय के कुप्रबंधन (misgovernance) के कारण केरल का विकास प्रभावित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और उनका भरोसा Bharatiya Janata Party (BJP) और NDA पर बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं (कऱ्यकर्ताओं) से सीधे संवाद किया और उन्हें बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “मेरा बूथ, सबसे मजबूत” का लक्ष्य ही पार्टी की जीत की नींव है और हर कार्यकर्ता की भूमिका इसमें बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, जहां BJP केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, LDF और UDF दोनों ही गठबंधनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी नीतियों और विकास कार्यों का बचाव किया है। केरल की राजनीति लंबे समय से LDF और UDF के बीच केंद्रित रही है, लेकिन BJP लगातार राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास में लगी हुई है। ऐसे में आने वाले चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। Years of LDF and UDF misgovernance held Keralam back. The people are placing their trust in the BJP-NDA. Interacting with the Karyakartas during ‘Mera Booth, Sabse Mazboot Samvaad.’ https://t.co/OSTQ84bh4i— Narendra Modi (@narendramodi) April 2, 2026