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वरिष्ठ IPS अधिकारियों की केंद्र प्रतिनियुक्ति आदेश पर HC में सुनवाई, 18 मार्च तक मांगा जवाब

Metroheadlines मार्च 17, 2026 0

 

प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है.

 

उत्तराखंड कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. न्यायालय ने दोनों पक्षों को 18 मार्च तक अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

 

नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियमों और पदों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अदालत ने यह जानना चाहा कि राज्य कैडर से इस स्तर के कितने अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में भेजा जा सकता है और कितने पद स्थायी रूप से राज्य सरकार के अधीन रहते हैं.

 

आईटीबीपी-बीएसएफ में है आदेश

 

दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर भेजने का आदेश जारी किया गया है. वहीं वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है. यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को जारी किए गए थे.

 

 

6 मार्च को जारी हुए थे आदेश

 

केंद्र सरकार के आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए थे. हालांकि, इन आदेशों को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की.

 

सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार में ऐसे कुल 16 पद हैं, जिन पर राज्य कैडर के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भेजा जा सकता है. बाकी पद राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहते हैं. अदालत ने इस जानकारी के बाद केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया किन नियमों और प्रावधानों के तहत की गई है.

 

मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की है. साथ ही दोनों सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तब तक अपने-अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें.

 

 

अगली सुनवाई 18 मार्च को

 

अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जिसमें अदालत सरकारों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी. यह मामला प्रशासनिक और सेवा नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित 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नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

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रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

राज्य/शहर

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वरिष्ठ IPS अधिकारियों की केंद्र प्रतिनियुक्ति आदेश पर HC में सुनवाई, 18 मार्च तक मांगा जवाब

  प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है.   उत्तराखंड कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. न्यायालय ने दोनों पक्षों को 18 मार्च तक अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.   नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियमों और पदों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अदालत ने यह जानना चाहा कि राज्य कैडर से इस स्तर के कितने अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में भेजा जा सकता है और कितने पद स्थायी रूप से राज्य सरकार के अधीन रहते हैं.   आईटीबीपी-बीएसएफ में है आदेश   दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर भेजने का आदेश जारी किया गया है. वहीं वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है. यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को जारी किए गए थे.     6 मार्च को जारी हुए थे आदेश   केंद्र सरकार के आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए थे. हालांकि, इन आदेशों को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की.   सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार में ऐसे कुल 16 पद हैं, जिन पर राज्य कैडर के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भेजा जा सकता है. बाकी पद राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहते हैं. अदालत ने इस जानकारी के बाद केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया किन नियमों और प्रावधानों के तहत की गई है.   मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की है. साथ ही दोनों सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तब तक अपने-अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें.     अगली सुनवाई 18 मार्च को   अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जिसमें अदालत सरकारों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी. यह मामला प्रशासनिक और सेवा नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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मिडिल ईस्ट तनाव से केले का निर्यात ठप, ₹25 का केला ₹8 में बेचने को मजबूर किसान

  Barwani Banana Export Crisis: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का केला भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय निर्यात में भारी गिरावट का सामना कर रहा है. केले का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है.   अपनी विशेष मिठास और गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में मशहूर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का केला इन दिनों ईरान-इजरायल संकट का शिकार हो गया है. खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के कारण बड़वानी से होने वाला केले का निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ गया है. रमजान के इस महीने में जहां केले की मांग और दाम अपने चरम पर होते हैं, वहीं इस बार विदेशी सप्लाई चेन टूटने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.   नर्मदा नदी के किनारे बसे होने के कारण बड़वानी जिले की मिट्टी बेहद उपजाऊ है और यहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता है. यही भौगोलिक परिस्थितियां यहां के केले को एक खास स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता प्रदान करती हैं. हर साल यहां से हजारों टन केला खाड़ी और मिडिल ईस्ट के देशों में निर्यात किया जाता है. इन केलों के प्रमुख विदेशी खरीदारों में ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और दुबई (यूएई) जैसे देश शामिल हैं.     25 रुपये से सीधे 8-9 रुपये पर आई कीमतें   मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों ने स्थानीय किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है. रमजान के वक्त अमूमन बाजार में केले की भारी मांग रहती है, लेकिन इस बार विदेशी खरीदार न होने से बाजार में भारी सुस्ती है. युद्ध के तनाव से पहले तक किसानों को अपनी फसल का दाम लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल रहा था. निर्यात रुकने से अब यह भाव औंधे मुंह गिरकर महज 8 से 9 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. खेतों में फसल पूरी तरह से पककर तैयार है, लेकिन सही खरीदार न मिलने से किसानों को मजबूरी में भारी घाटा सहकर अपना माल बेचना पड़ रहा है.   घरेलू मंडियों में ओवरसप्लाई से बिगड़ा खेल   व्यापारियों का कहना है कि हर साल बड़वानी से जो केला सीधा विदेश जाता था, उसके निर्यात पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है. इस कारण ट्रकों का रुख अब देश की घरेलू मंडियों की तरफ मुड़ गया है. विदेशी खेप को अब मजबूरी में दिल्ली, ग्वालियर और देश के अन्य बड़े शहरों की मंडियों में भेजा जा रहा है. इन घरेलू मंडियों में अचानक आवक (Oversupply) बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण वहां भी भाव गिर गए हैं और किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं.   केले की नकदी फसल पर पूरी तरह निर्भर बड़वानी के हजारों किसानों के लिए यह समय एक बड़े आर्थिक संकट का है. पूरा किसान और व्यापारी वर्ग अब इसी उम्मीद में है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द सामान्य हों, ताकि उनका व्यापार एक बार फिर से पटरी पर लौट सके.    

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'आमदनी कम और खर्च ज्यादा गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों पर यूपी की गृहिणियों ने क्या कहा?

  LPG Price Hike: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में दाम 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये की बढ़ोत्तरी की है. इस पर यूपी की महिलाओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.      मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है और इसका सीधा असर भारत में एलपीजी गैस की कीमतों पर देखने को मिला है। भारत में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर यानी 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है।   नई दरें आज से लागू हो गई हैं, जिससे देशभर में करोड़ों परिवारों को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ने वाला है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।   भारत में एलपीजी गैस का उपयोग करोड़ों परिवारों की रसोई का आधार बन चुका है। ऐसे में इसकी कीमत में छोटी सी बढ़ोतरी भी बड़े आर्थिक प्रभाव पैदा करती है। अब 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कई शहरों में और ज्यादा हो गई है।     इंडियन ऑयल ने बढ़ाई कीमतें   घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान Indian Oil Corporation द्वारा किया गया है। कंपनी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलपीजी की लागत बढ़ी है, जिसके चलते कीमतों में बदलाव करना पड़ा है। तेल कंपनियों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने का असर सीधे एलपीजी के दामों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।     घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा   नए फैसले के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी देश के अलग-अलग शहरों में लागू हो गई है। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग भारत के अधिकांश परिवारों की रसोई में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का मतलब है कि हर महीने घर का बजट प्रभावित होगा। कई परिवार पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।     कमर्शियल सिलेंडर भी महंगा   घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब है कि बाहर खाना भी अब पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है।     ईरान-इजरायल तनाव का असर   मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।   मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है। जब तेल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं।     जनता की जेब पर असर   एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ता है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से हर महीने घर का बजट प्रभावित होता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी समस्या बन सकती है। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच अब रसोई का खर्च और बढ़ जाएगा।     मुरादाबाद की महिलाओं की प्रतिक्रिया   उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कई महिलाओं ने गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। Moradabad एक महिला ने कहा कि सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और पहले से ही कई तरह की आर्थिक समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि आमदनी कम है और खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अन्य गृहिणी ने भी कहा कि जब वे सिलेंडर लेने गईं तो पता चला कि कीमत बढ़ गई है। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने से परिवार का खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।     महंगाई पर पड़ सकता है असर   विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। जब कमर्शियल सिलेंडर महंगा होता है तो होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा देते हैं। इसके अलावा छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में कई वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है।     सरकार के सामने चुनौती   एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी सरकार के लिए भी चुनौती बन सकती है क्योंकि महंगाई हमेशा एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा होती है। सरकार को एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ जनता को राहत देने की जिम्मेदारी भी होती है।     भविष्य में क्या हो सकता है   ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है तो तेल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

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