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भोपाल में कटारा हिल्स में आग, लेट पहुंची दमकल:रजाई-गद्दे की दुकान में घटना; 20 फीट तक ऊपर उठी आग की लपटें

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0

भोपाल के कटारा हिल्स स्थित एक रजाई-गद्दे की दुकान में देर रात आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि लपटें 20 फीट तक ऊपर उठ गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो आग पर जल्दी काबू पा लिया जाता, लेकिन फायर ब्रिगेड ही करीब 45 मिनट देरी से मौके पर पहुंची।

 

कटारा हिल्स के स्प्रिंग वैली में श्री वृंदावन फास्ट फूड एंड रेस्टोरेंट है। ठीक इसके पास रजाई-गद्दे की दुकान है। गुरुवार-शुक्रवार की देर रात इसी दुकान में आग लगी। राहगीर और आसपास के लोगों ने तुरंत दमकल बुलाने के लिए फायर स्टेशन पर कॉल किया, लेकिन पौन घंटे तक दमकल मौके पर ही नहीं पहुंची। इससे लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

 

देखिए तस्वीरें…

 

कटारा हिल्स में एक रजाई-गद्दे की दुकान में देर रात आग लगी।

 

कटारा हिल्स में एक रजाई-गद्दे की दुकान में देर रात आग लगी।

 

फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।

 

फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।

 

प्रत्यक्षदर्शियों ने फायर ब्रिगेड पर देर से आने का आरोप लगाया है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों ने फायर ब्रिगेड पर देर से आने का आरोप लगाया है।

 

प्रत्यक्षदर्शी बोले- गाड़ी खराब हो गई - आगजनी का मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो भी बताया। एक महिला ने कहा कि पौन घंटा तक

                                                             दमकल मौके पर नहीं आई।

 

जब आई तो उसमें कर्मचारियों ने खराब बताई। फिर कुछ संसाधन ढूंढने लगे। जब संसाधन मिले तो गाड़ी ठीक की गई और फिर आग बुझाई गई। हालांकि, तब तक पूरी दुकान जल चुकी थी।

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

ये हैं सबसे गलत और खतरनाक फूड कॉम्बिनेशन, आयुर्वेद में भी है इनका जिक्र

  Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है   Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए.      क्या कहता है आयुर्वेद?     आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.     किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए?     kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं.   गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया.     किन चीजों का सेवन करना चाहिए?     आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.  

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ईरान पर जारी अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मुज्तबा खामेनेई और नईम कासिम को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मानना ​​है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाएं होंगी.

  US Israel Iran War: ईरान के नए सुप्रीम लीडर को भी नहीं बख्शेगा इजरायल! नेतन्याहू बोले-‘मुज्तबा खामेनेई की जान की कोई गारंटी नहीं’   मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। इस जंग ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसी बीच Benjamin Netanyahu ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बख्शने वाला नहीं है जो आतंकवाद या इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल हो।   इजरायली प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के संभावित नए सुप्रीम लीडर माने जा रहे Mojtaba Khamenei की जान की भी कोई गारंटी नहीं है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।   मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष   पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। Israel और Iran के बीच तनाव नया नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में यह संघर्ष खुली जंग की शक्ल लेता दिख रहा है। अमेरिका के समर्थन के साथ इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी बढ़ती सैन्य ताकत को रोकने की कोशिश कर रहा है।   विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ दो देशों के बीच नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शक्ति संतुलन की लड़ाई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।   नेतन्याहू की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त संदेश   इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सुन्नी और शिया दोनों तरह के चरमपंथी समूह दुनिया के लिए खतरा हैं और इनसे निपटना जरूरी है।   उन्होंने कहा कि यह समस्या अपने आप खत्म नहीं होने वाली है। अगर आतंकवादी संगठन और उनके समर्थक देशों को रोका नहीं गया तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।   नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायल अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और वह अपने दुश्मनों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।     मुज्तबा खामेनेई को लेकर चेतावनी   ईरान की राजनीति में Mojtaba Khamenei को एक बेहद प्रभावशाली शख्स माना जाता है। वह ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे हैं और लंबे समय से सत्ता के केंद्र में सक्रिय बताए जाते हैं।   नेतन्याहू ने जब पत्रकारों के सवाल का जवाब दिया तो उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए “लाइफ इंश्योरेंस” नहीं लेगा। इसका मतलब साफ है कि अगर जरूरत पड़ी तो ऐसे नेताओं को भी निशाना बनाया जा सकता है।   उन्होंने कहा, “मैं किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लूंगा। उनकी जान की कोई गारंटी नहीं है।” इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है।     हिजबुल्लाह को लेकर भी कड़ी चेतावनी   इजरायल और लेबनान के बीच तनाव का एक बड़ा कारण Hezbollah है। यह शिया मिलिशिया संगठन लंबे समय से इजरायल के खिलाफ सक्रिय रहा है और इसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है।   नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने लेबनान सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर उसने हिजबुल्लाह को निहत्था नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे।   उन्होंने कहा कि अगर लेबनान सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो इजरायल खुद कार्रवाई करेगा और हिजबुल्लाह को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।     नईम कासिम का नाम भी चर्चा में   प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने हिजबुल्लाह के नेता Naim Qassem के बारे में भी सवाल पूछा। इस पर नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के नेताओं को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।   हालांकि उन्होंने किसी विशेष ऑपरेशन की जानकारी देने से इनकार कर दिया लेकिन संकेत दिया कि आने वाले समय में कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं।     क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश?   एक सवाल के जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में मौजूदा शासन को गिराने का काम ईरानी जनता ही कर सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल और उसके सहयोगी ईरान के लोगों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान का मौजूदा शासन खत्म हो जाता है तो क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है। नेतन्याहू के अनुसार, “अगर यह शासन खत्म हो जाता है तो समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है तो यह बेहद कमजोर जरूर हो जाएगा।”   पूरे मिडिल ईस्ट को बदलने का दावा   इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी वादा किया था कि वह मध्य-पूर्व की तस्वीर बदल देंगे। उनके अनुसार अब क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल रहा है और कई देश इजरायल के साथ सहयोग करने को तैयार हैं।   उन्होंने कहा कि अब इजरायल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और उसके दुश्मन भी यह बात समझने लगे हैं।   नेतन्याहू के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।     अमेरिका की भूमिका   इस पूरे संघर्ष में United States की भूमिका भी बेहद अहम है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी वह लगातार दबाव बना रहा है।   विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है।     क्षेत्रीय देशों की चिंता   मिडिल ईस्ट के कई देश इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं। तेल उत्पादन करने वाले देशों को डर है कि अगर युद्ध फैलता है तो इससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   इसके अलावा क्षेत्र में पहले से मौजूद राजनीतिक और धार्मिक तनाव भी और बढ़ सकता है।

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ईरान के सर्वोच्च नेता बने मोजतबा खामेनेई, IRGC और राष्ट्रपति से लेकर तीनों सेनाओं ने ली वफादारी की शपथ, ट्रंप नाखुश

 Iran New Supreme Leader:  ईरान में मोजतबा हुसैनी खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं. उन्हें देश का सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. यह फैसला ट्रंप की धमकी के बावजूद लिया गया                         ईरान के सर्वोच्च नेता बने मोजतबा हुसैनी खामेनेई   ईरान के इतिहास में एक अहम पल आ गया है. आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. उनके पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही ईरान के एक्सपर्ट्स असेंबली ने यह फैसला लिया. ईरान की 88 सदस्यों वाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 'निर्णायक वोट' से मोजतबा खामेनेई को तीसरे सर्वोच्च नेता के रूप में चुना है. अब वह अपने पिता आयतुल्लाह खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं.   सेना से लेकर राजनेताओं ने ली वफादारी की शपथ   अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही नाम की घोषणा हुई, ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और राजनीतिक नेताओं ने तुरंत मोजतबा खामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली. IRGC ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हम नए नेता आयतुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई के हुक्म का पालन करने और खुद को कुर्बान करने के लिए तैयार हैं. सेना के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी वफादारी का वादा किया है.' संसद के स्पीकर ने इसे 'धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य' बताया है. सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि नया नेता इस मुश्किल वक्त में देश को सही दिशा दिखाने में सक्षम हैं.   पावर ब्रेकर कहे जाते थे मोजतबा खामेनेई   असेंबली ने मदरसों और यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स समेत पूरे देश से अपील की है कि वे नए नेता के पीछे एकजुट हो जाएं और देश की एकता बनाए रखें. मोजतबा खामेनेई 56 साल के हैं. वे लंबे समय से अपने पिता के ऑफिस में काम कर रहे थे और IRGC से बहुत करीबी रिश्ते रखते हैं. वे सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं दिखते थे, लेकिन पीछे से बहुत ताकतवर माने जाते थे. उन्हें 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' कहा जाता था.   इराक के साथ जंग में लड़े थे मोजतबा   मोजतबा 1980-88 तक 17-18 साल की उम्र में ईरान-इराक युद्ध के आखिरी दिनों में शामिल हुए थे. IRGC की हबीब इब्न मजाहिर बटालियन में सेवा दी थी. युद्ध के कई कमांडर बाद में IRGC में ऊंचे पदों पर पहुंचे. युद्ध के बाद मोजतबा कोम चले गए, जहां उन्होंने शिया धर्म की पढ़ाई की. कई कंजर्वेटिव विद्वानों के पास तालीम ली. आज उनकी रैंक हुज्जतुल इस्लाम (मिड-लेवल क्लेरिक) है.

Metroheadlines मार्च 9, 2026 0

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