वैश्विक बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय मुद्रा में मंगलवार को कुछ मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद कि Iran से जुड़ा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, निवेशकों में राहत का माहौल बना। इसी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा और Indian Rupee अपने हालिया ऑल टाइम लो से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हो गया।
मंगलवार को सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 7 पैसे मजबूत होकर 92.14 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को रुपया गिरावट के साथ बंद हुआ था और उसने नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया था।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार सुबह Indian Rupee 91.92 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन बाद में यह 92.14 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 7 पैसे की मजबूती को दर्शाता है। सोमवार को रुपया 39 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 92.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो कि अब तक का सबसे निचला बंद स्तर था।
उस दिन वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था।
मंगलवार को रुपये में आई मजबूती के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण रहे। सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और डॉलर में कमजोरी रही।
वैश्विक तेल मानक Brent Crude वायदा कारोबार में लगभग 4.69 प्रतिशत गिरकर 94.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होता है।
इसके अलावा छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला US Dollar Index भी 0.26 प्रतिशत गिरकर 98.92 पर आ गया। डॉलर में आई इस कमजोरी से भी रुपये को मजबूती मिली।
भारतीय शेयर बाजार की मजबूती ने भी रुपये को समर्थन दिया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज उछाल देखने को मिला।
BSE Sensex 809.57 अंक की तेजी के साथ 78,375.73 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 252.75 अंक बढ़कर 24,280.80 पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार में तेजी आने से विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिससे मुद्रा को भी समर्थन मिलता है।
हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये की मजबूती सीमित रही।
वैश्विक निवेशकों को राहत उस समय मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि Iran से जुड़ा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण पिछले कुछ दिनों से तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही थी। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी।
ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों को उम्मीद जगी कि यदि तनाव कम होता है तो ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
रुपये को मजबूती मिलने की एक और वजह यह रही कि दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह G7 ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर सकते हैं।
इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की मुद्राओं को समर्थन मिला।
Anil Kumar Bhansali, जो Finrex Treasury Advisors LLP में हेड ऑफ ट्रेजरी और कार्यकारी निदेशक हैं, के अनुसार सोमवार को रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।
लेकिन जब G7 ने तेल बाजार को स्थिर करने के लिए कदम उठाने के संकेत दिए, तो तेल की कीमतों में गिरावट आई और बाजार को राहत मिली।
भंसाली के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बयान से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा कि युद्ध की स्थिति जल्द खत्म हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि रूस पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में संभावित ढील और तेल कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों से भी बाजार को सहारा मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में Indian Rupee सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
Anil Kumar Bhansali के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपया 91.50 से 92.10 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक बाजार के रुख, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा। समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? 1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा। 2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। 3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है। 4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। 5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी… 1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है। 2. BSNL अफसर का मामला हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है। नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग? सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।
भारत में बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरकार ने आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से जुड़े नियमों में बदलाव करने का फैसला लिया हैं..... IPO Rules Change: भारत में बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरकार ने आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए यह अनुमति दी है कि जिन कंपनियों का लिस्टिंग के बाद बाजार मूल्य 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, उन्हें पब्लिक को अपनी चुकता पूंजी का केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा ही बेचना होगा. इससे पहले कई बड़ी कंपनियों को अपना पब्लिक इश्यू लाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था. आइए जानते हैं, नए नियमों के तहत कौन-कौन से बदलाव किए गए हैं? ये हुए अहम बदलाव 1. नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने हर इक्विटी शेयर वर्ग का कम से कम 2.5 प्रतिशत हिस्सा आम निवेशकों के लिए रखना होगा. इसके साथ ही सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग को धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए एक तय समयसीमा भी निर्धारित की है, ताकि बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ सके. 2. नए नियमों के मुताबिक अगर किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय सार्वजनिक हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से कम है, तो उसे 5 साल के भीतर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत और 10 साल के अंदर 25 प्रतिशत तक करना होगा. वहीं जिन कंपनियों के आईपीओ के समय ही पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से ज्यादा है, उन्हें अगले 5 साल के भीतर इसे 25 प्रतिशत तक पहुंचाना अनिवार्य होगा. 3. सरकार ने कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर पब्लिक शेयरहोल्डिंग के अलग-अलग नियम तय किए हैं. जिन कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 लाख करोड़ रुपये से 5 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा, उन्हें आईपीओ के दौरान कम से कम 2.75 प्रतिशत शेयर आम निवेशकों को देने होंगे. 4. जिन कंपनियों का आकार इससे छोटा है, उनके लिए पब्लिक हिस्सेदारी का प्रतिशत ज्यादा रखा गया है. उदाहरण के तौर पर 50,000 करोड़ रुपये से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों को कम से कम 8 प्रतिशत शेयर जनता के लिए जारी करने होंगे. ताकि बाजार में निवेशकों की भागीदारी बनी रहे. 5. नए नियमों में यह भी कहा गया है कि अगर किसी कंपनी के पास सुपीरियर वोटिंग राइट्स (SVR) वाले इक्विटी शेयर हैं और वह अपने सामान्य शेयरों को शेयर बाजार में लिस्ट करना चाहती है, तो ऐसे SVR शेयरों को भी साथ में लिस्ट करना जरूरी होगा. एनएसई और रिलायंस जियो को रास्ता हुआ आसान सरकार ने इन नए नियमों को आधिकारिक तौर पर लागू भी कर दिया है. विषय की समझ रखने वाले जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद कई बड़ी कंपनियों के आईपीओ आने की संभावना बढ़ सकती है. खास तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता ज्यादा आसान माना जा रहा है.
Iran Israel War: पुतिन ने यह भी कहा कि Russia दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में से एक है. ऐसे में मौजूदा हालात से मॉस्को को फायदा मिल सकता है. Middle East Tensions: ईरान पर United States और Israel के संयुक्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है. ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के साथ-साथ अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इस बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है. इसी कड़ी में Vladimir Putin ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. पुतिन की चेतावनी रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर European Union इच्छुक हो तो रूस लंबे समय तक ऊर्जा सहयोग के लिए तैयार है. सीनियर सरकारी अधिकारियों और रूस की प्रमुख तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ टेलीविजन बैठक में पुतिन ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बिगड़ती स्थिति के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन गया है. इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. तेल की कीमतों में उछाल इस तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो साल 2022 के बाद पहली बार इतना ऊंचा स्तर है. तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से Strait of Hormuz से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण देखी जा रही है. यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. पुतिन ने यह भी कहा कि Russia दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में से एक है. ऐसे में मौजूदा हालात से मॉस्को को फायदा मिल सकता है. उन्होंने रूस की ऊर्जा कंपनियों से कहा कि वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहें.
अनिल अंबानी से जुड़े 10 से 12 ठिकानों पर ED की छापेमारी, कार्रवाई के बीच उछले शेयर Anil Ambani: ED की करीब 15 अलग-अलग टीमों ने आज सुबह-सुबह अनिल अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़े 10 से 12 ठिकानों पर छापामारी की. यह उनके खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच का एक हिस्सा है. Anil Ambani: उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ आज एक बार एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. इसके तहत, उनकी कंपनियों से जुड़े ठिकानों पर छापामारी की गई है. यह कथित तौर पर उनके खिलाफ चल रही वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच का एक हिस्सा है. अधिकारियों के मुताबिक, ED की करीब 15 अलग-अलग टीमों ने आज सुबह-सुबह 10 से 12 जगहों पर छापामारी की. इनमें से ज्यादातर लोकेशंस मुंबई में थे. सूत्रों ने बताया कि यह छापामारी रिलायंस पावर और उनसे जुड़ी दूसरी कंपनियों और लोगों के खिलाफ की जा रही है. इससे पहले, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ 2200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग फ्रॉड का केस दर्ज किया था. आज ईडी की इस कार्रवाई के बीच रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा के शेयरों में तेजी देखने को मिली. एक तरफ रिलायंस पावर के शेयर 2 परसेंट उछलकर 23 रुपये पर पहुंच गए हैं. वहीं, रिलायंस इंफ्रा के शेयर 4 परसेंट से ज्यादा की तेजी के साथ 94.20 रुपये पर कारोबार करते नजर आए. पिछले हफ्ते हुई 10 घंटे की पूछताछ अभी पिछले ही हफ्ते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और दूसरे लेंडर्स से मिले लोन से जुड़े 40000 करोड़ रुपये के बैंकिंग फ्रॉड केस में ईडी ने अंबानी से 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ की थी. हालांकि, अधिकारियों का यह भी कहना है कि वह यस बैंक से मिले लोन से जुड़ी एक अलग मनी-लॉन्ड्रिंग जांच में पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए. जांच के दौरान ED ने अंबानी से जुड़ी संपत्ति भी प्रोविजनल तौर पर अटैच की है, जिसमें लगभग 3761 करोड़ रुपये की एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी भी शामिल है. अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 15000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. अनिल अंबानी पर आरोप अनिल अंबानी पर बैंकों से लिए गए फंड्स को अपनी कंपनियों के जरिए डायवर्ट करने का आरोप है. आसान भाषा में कहे तो रिलायंस कम्युनिकेशन और रिलायंस पावर जैसी उनकी कंपनियों ने कथित तौर पर बैंकों से नई मशीने, टावर लगाने जैसे बिजनेस रिलेटेड कामों के लिए हजारों रुपये का लोन लिया. लेकिन इन पैसों को असल काम में लगाने के बजाय एक खाते से दूसरे खाते में घुमाने, शेल कंपनियों को लोन या पेमेंट के नाम पर देने का आरोप है.