इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव फैल गया है। इस जंग में ईरान, इजराइल,सऊदी, लेबनान, UAE जैसे मिडिल ईस्ट के कुल 12 देश शामिल हो चुके हैं। हालांकि जंग के 9 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक यमन इससे दूर है।
यमन में हूती विद्रोही रहते हैं जो कि ईरान के सहयोगी माने जाते हैं। अक्टूबर 2023 में गाजा जंग शुरू होने के बाद कई बार इजराइल और हूती विद्रोही एक-दूसरे पर हमला कर चुके हैं। पिछले साल जून में इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन जंग चली थी, तब भी हूती विद्रोही इस जंग में शामिल थे।
हालांकि इस बार 28 फरवरी से जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, तब से अब तक हूती विद्रोहियों ने ईरान का समर्थन केवल बयानों के जरिए ही किया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि वे आगे भी इस जंग से दूर रहेंगे या नहीं।
यमन में अभी तक इजराइल और अमेरिका के हमलों से बचा हुआ है।
अमेरिका-इजराइल के हमले से बचना मकसद
अल जजीरा के मुताबिक एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि हूती जंग में हिस्सा लेंगे। फिलहाल उनका इससे दूर रहना किसी रणनीति से जुड़ा हो सकता है।
मिडिल ईस्ट मामलों पर नजर रखने वाले लुका नेवोला ने अल जजीरा से कहा कि हूती विद्रोहियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि अमेरिका और इजराइल की सीधी जवाबी कार्रवाई से बचा जाए।
पिछले साल अगस्त में इजराइल ने यमन में हवाई हमले किए थे, जिनमें हूती सरकार के कम से कम 12 सीनियर मेंबर मारे गए थे। इनमें प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और आर्मी चीफ मोहम्मद अल-घुमारी भी शामिल थे।
यह हूती विद्रोहियों के लिए बहुत बड़ा नुकसान था। अमेरिका तथा इजराइल के साथ टकराव में उनकी सबसे बड़े नुकसान में से एक माना गया था।

अहमद अल रहावी की मौत 28 अगस्त 2025 को सना (यमन) में इजराइली एयरस्ट्राइक में हुई थी।
इजराइल के हमलों के बाद हूती विद्रोही सतर्क हुए
इस घटना और पिछले साल हुए अन्य हमलों के बाद हूती लीडरशिप अब ज्यादा सतर्क हो गया है। उन्हें डर है कि अगर वे बड़ा कदम उठाते हैं तो उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर भारी हवाई हमले हो सकते हैं।
नेवोला के मुताबिक हूती विद्रोहियों को इजराइल की खुफिया क्षमता से भी डर है और उन्हें आशंका है कि उनकी टॉप लीडरशिप को निशाना बनाया जा सकता है।
हालांकि पिछले साल के नुकसान के बावजूद हूती विद्रोही पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं और वे अब भी अपने विरोधियों पर हमले करने की क्षमता रखते हैं।
नेवोला के अनुसार अगर अमेरिका या इजराइल सीधे उन पर हमला करते हैं या यमन में उनके विरोधी गुट उनके खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू करते हैं, तो हूती फिर से हमले तेज कर सकते हैं।
हूती विद्रोही बोले- जंग के लिए तैयार हैं
हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इस सप्ताह कहा कि यमन ईरान और वहां की जनता के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि उनके सैनिक युद्ध के लिए तैयार हैं और हालात के हिसाब से किसी भी समय सैन्य कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
यमनी राजनीतिक विश्लेषक सदाम अल-हुरैबी का कहना है कि अगर ईरान उनसे मदद मांगेगा तो हूती युद्ध में शामिल हो सकते हैं। उनके मुताबिक तेहरान फिलहाल अपने सभी विकल्प एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहता और वह आने वाले समय के लिए हूती विद्रोहियों को एक अहम ताकत के रूप में बचाकर रखना चाहता है।
अल-हुरैबी ने कहा कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले नहीं रुकते, तो हूती लंबे समय तक चुप नहीं बैठेंगे। उनके अनुसार सना और हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले अन्य इलाकों में युद्ध की तैयारी चल रही है।
हूती विद्रोहियों के पास रेड सी में फिर से अशांति फैलाने की क्षमता है। वे ड्रोन और मिसाइल के जरिए इजराइल पर भी हमला कर सकते हैं। अल-हुरैबी का कहना है कि ऐसा होना लगभग तय है, बस यह हूती विद्रोहियों और ईरान के तय समय पर निर्भर करेगा।
हूती विद्रोहियों के पास कई लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता है। नेवोला के अनुसार अगर युद्ध लंबा चलता है और हूती विद्रोहियों को सीधे खतरा महसूस होता है, तो वे अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर इजराइल, अमेरिकी युद्धपोतों, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल के सहयोगी देशों जैसे संUAE और सोमालिलैंड को भी निशाना बना सकते हैं।

यमन में खामेनेई की मौत के बाद 1 मार्च को ईरान के समर्थन में रैली निकाली गई। इसमें खामेनेई की तस्वीर को चूमता एक युवक।
जहाजों पर हमला कर सकते हैं हूती विद्रोही
साल 2023 के आखिर से लेकर 2025 तक हूती विद्रोहियों ने रेड सी से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार हमले किए थे। इस अभियान में कम से कम 9 नाविकों की मौत हुई और चार जहाज डूब गए। इससे रेड सी के ट्रेड पर बड़ा असर पड़ा, जहां से हर साल लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का सामान गुजरता था।
अमेरिका और इजराइल के हालिया हमलों में ईरान के कई राजनीतिक और सैन्य नेताओं की भी मौत हुई है। अगर ईरानी शासन कमजोर पड़ता है या गिर जाता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान यमन के हूती विद्रोहियों को भी हो सकता है।
अल-हुरैबी के अनुसार अगर ईरान कमजोर होता है, तो यमन तक पहुंचने वाले ईरानी हथियारों की तस्करी कम हो सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है। यह हूती विद्रोहियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
संयुक्त राष्ट्र ने 2022 में कहा था कि अरब सागर में पकड़े गए हजारों हथियार शायद ईरान के एक ही बंदरगाह से भेजे गए थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि रूस, चीन और ईरान में बने हथियार नावों और जमीन के रास्ते यमन में तस्करी करके पहुंचाए जाते थे। हालांकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
कौन हैं हूती विद्रोही
साल 2014 में यमन में गृह युद्ध शुरू हुआ। इसकी जड़ शिया-सुन्नी विवाद है। कार्नेजी मिडिल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत से गृह युद्ध में बदल गया। 2014 में शिया विद्रोहियों ने सुन्नी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
इस सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी कर रहे थे। हादी ने अरब क्रांति के बाद लंबे समय से सत्ता पर काबिज पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से फरवरी 2012 में सत्ता छीनी थी। हादी देश में बदलाव के बीच स्थिरता लाने के लिए जूझ रहे थे। उसी समय सेना दो फाड़ हो गई और अलगाववादी हूती दक्षिण में लामबंद हो गए।
अरब देशों में दबदबा बनाने की होड़ में ईरान और सऊदी अरब भी इस गृह युद्ध में कूद पड़े। एक तरफ हूती विद्रोहियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला। तो सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का।
देखते ही देखते हूती के नाम से मशहूर विद्रोहियों ने देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ये हो गए थे कि विद्रोहियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया था।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Iran-US Talk: ईरान शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचने पर US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस को उमर फारूक ज़हूर से मिलवाया गया था, जिस पर कई तरह के संगीन आरोप है. US Iran Talks 2.0: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ शांति बातचीत के पहले दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे. उस वक्त से जुड़ी एक छोटी सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, वेंस को एक व्यक्ति से मिलवाते दिखे. बाद में नॉर्वे के अखबार VG ने उस व्यक्ति की पहचान उमर फारूक ज़हूर के रूप में की. यही से यह मामला चर्चा में आ गया. उमर फारूक ज़हूर एक ऐसा नाम है जिसे अलग-अलग देशों में अलग नजर से देखा जाता है. नॉर्वे में वह एक वॉन्टेड व्यक्ति हैं जिन पर बड़े वित्तीय अपराधों के आरोप हैं, जबकि पाकिस्तान में उन्हें सम्मानित निवेशक के रूप में देखा जाता है. उमर फारूक ज़हूर का जन्म ओस्लो में हुआ था. उनके माता-पिता पाकिस्तान के सियालकोट से थे. नॉर्वे में उमर फारुक खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 2003 में हुई थी, जब एक अदालत ने उन्हें अपने ही परिवार की ट्रैवल एजेंसी से पैसे के गबन के मामले में एक साल की सजा सुनाई थी. लेकिन वह सजा सुनाए जाने के समय कोर्ट में पेश नहीं हुए और देश छोड़कर चले गए. नॉर्वे सरकार का आरोप साल 2010 से नॉर्वे की पुलिस उमर फारूक ज़हूर को एक बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस में तलाश रही है. आरोप है कि नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक मामले में 60 मिलियन से ज्यादा नॉर्वेजियन क्रोनर की हेराफेरी हुई. नॉर्वे की एजेंसियां लगातार उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग करती रही हैं, लेकिन ज़हूर इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. स्विट्जरलैंड और अन्य देशों में जांच ज़हूर का नाम सिर्फ नॉर्वे तक सीमित नहीं रहा. स्विट्जरलैंड में भी उनके खिलाफ जांच हुई थी. 2004 में उन पर एक नकली बैंक के जरिए निवेशकों से लगभग 20 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप लगे. हालांकि इस मामले में उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में केस समय सीमा खत्म होने के कारण बंद हो गया. इसके अलावा 2015 में घाना के साथ एक बड़े पावर प्रोजेक्ट डील में भी उनका नाम सामने आया. हालांकि इसमें उनकी सीधी भूमिका कितनी थी, यह साफ नहीं हो पाया और इस मामले में भी कोई सजा नहीं हुई. पाकिस्तान में अलग छवि यूरोप में लगे आरोपों के बावजूद पाकिस्तान में ज़हूर की छवि बिल्कुल अलग है. यहां उन्हें एक सफल बिजनेस मैन और निवेश लाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है. उन्हें देश में विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया गया है. मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’ दिया. यह सम्मान उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर में लगभग 700 मिलियन डॉलर के निवेश को आसान बनाने के लिए दिया गया. इमरान खान केस से जुड़ाव ज़हूर का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े तोशाखाना मामले में भी सामने आया. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस केस में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई थी. इसी मामले में आरोप था कि इमरान खान ने सरकारी तोहफे बेचे थे. ज़हूर ने दावा किया था कि उन्होंने एक महंगी घड़ी करीब 2 मिलियन डॉलर में खरीदी थी. इंटरपोल और कानूनी स्थिति एक समय पर ज़हूर के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था, जो पाकिस्तान में दर्ज एक केस से जुड़ा था. लेकिन 2022 में यह नोटिस वापस ले लिया गया, क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी मांग वापस ले ली थी और जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले. पाकिस्तान की अदालतों में भी उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली है. 2025 में एक कोर्ट ने नॉर्वे के एक मीडिया आउटलेट के खिलाफ मानहानि केस में ज़हूर के पक्ष में फैसला दिया. इस्लामाबाद में मौजूदगी पर सवाल इन सब घटनाओं के बीच, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ज़हूर का दिखना कई सवाल खड़े करता है. यह साफ नहीं है कि वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे, लेकिन यह बात साफ है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे एक देश में वॉन्टेड माना जाता है, दूसरे देश में सम्मानित है और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के करीब नजर आता है. उमर फारूक ज़हूर की कहानी उमर फारूक ज़हूर की कहानी एक ही व्यक्ति की दो अलग पहचान दिखाती है. नॉर्वे में वह एक बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा आरोपी है, जबकि पाकिस्तान में वह एक सम्मानित निवेशक और प्रभावशाली शख्सियत है. यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और ज्यादा दिलचस्प और जटिल बनाता है.
US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयास अब विफल हो गए हैं. US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के लिए की जा रही मध्यस्थता प्रयासों में ठहराव आ गया है. ईरान ने तय वार्ता में हिस्सा लेने से साफ इंकार कर दिया है. यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान समेत क्षेत्रीय देशों द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराए जाने के प्रयास अब नाकाम साबित हो रहे हैं. ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वह आगामी दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को अस्वीकार्य मानता है. रिपोर्ट में कहा गया, “ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को बताया कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और अमेरिकी मांगें अस्वीकार्य हैं.” पाकिस्तान की भूमिका पर असर इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की थी, लेकिन मध्यस्थता प्रयासों में प्रगति न होने के कारण यह प्रस्ताव अब टल गया है. इस्लामाबाद ने कहा था कि वह सार्थक वार्ता की मेजबानी और सुविधा देने के लिए तैयार है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि देश सम्मानित महसूस करेगा और सार्थक वार्ता में मदद देगा.” अमेरिका की प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत में है. उन्होंने कहा था, “हम इस वार्ता में बेहद अच्छी प्रगति कर रहे हैं." हालांकि उन्होंने कोई और विवरण नहीं दिया. ईरान का इनकार ईरान ने साफ कहा है कि वह पाकिस्तान के जरिए होने वाली बातचीत में शामिल नहीं है. ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने बताया कि अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं हुई. सिर्फ दूसरे लोगों के जरिए अमेरिका की “ज्यादा और गलत” मांगें भेजी गई हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान उसमें शामिल नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होना अच्छा है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि शुरुआत किसने की. ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 पॉइंट का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उसे “अवास्तविक और बेकार” बताते हुए ठुकरा दिया गया.
Middle East Conflict: अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां इजरायली हमले में IRGC के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टी हुई है. हाल ही में इजरायल ने इस बात का दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के लिए जिम्मेदार तंगसिरी की मौत हो गई है. इजरायली हमले के बाद गंभीर चोटों से वह उबर नहीं पाए. IRIB ने उनकी मौत की पुष्टी की है. इससे पहले इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि कमांडर को इजरायली सेना के लक्षित ऑपरेशन में मार गिराया गया था. अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. खाड़ी युद्ध में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को चुनौती देने में उनकी भूमिका अहम रही थी. लीरेजा तंगसिरी 26 मार्च को हुए बंदर अब्बास में इजरायली हमले के दौरान गंभीर चोट के चलते घायल हो गए थे. ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक हमले में मारे जा चुके हैं इससे पहले इस युद्ध में कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य हस्तियों की जान जा चुकी है. सबसे पहले इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में उनके परिसर पर हवाई हमला किया गया था. वह 86 साल के थे. 1989 से ईरान शीर्ष नेतृ्त्व संभाल रहे थे. इनके अलावा अली लारीजानी जो सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे. उनकी मौत 17 मार्च को हमले के दौरान हो गई थी. वह 67 साल के थे. ईरानी मीडिया के अनुसार उनके साथ उनके बेटे और उनके एक डिप्टी भी मारे गए थे. इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे. 18 मार्च को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई थी. अगस्त 2021 में उन्होंने नागरिक खुफिया तंत्र का नेतृत्व संभाला था. इनके अलावा आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर की 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मौत हो गई थी. इसके अलावा वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह 28 फरवरी को तेहरान के हमले में मारे गए. ईरान सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी 28 फरवरी के हमले में मारे गए. बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी 17 मार्च को हुए हमले में मारे गए. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना खुफिया प्रमुख बेहनम रजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में हमले के दौरान मारे गए.